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कृत्रिम बुद्धिमत्ता: वैश्विक एआई का अगुआ बनने से आखिर हमें क्या रोकता है... भारत को थिंक टैंक बनाने की जरूरत

अजय डाटा, फिक्की की यूए और बहुभाषी समिति के चेयरमैन Published by: दीपक कुमार शर्मा Updated Thu, 30 Jan 2025 06:30 AM IST

सार

चीन के डीपसीक का हर तरफ शोर है। लेकिन यह हमें इस बात का अवसर भी देता है कि हम अपने भीतर झांकें। आखिर वह कौन-सी चीज है, जो हमें कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) के क्षेत्र में अगुआ बनने से रोक रही है?
 
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AI Tool - फोटो : Freepik


भारत व वैश्विक एआई निवेश

 2025 में अमेरिका ने एआई परियोजनाओं के लिए 500 अरब डॉलर से अधिक का फंड देने की घोषणा की है। गूगल, माइक्रोसॉफ्ट और ओपनएआई जैसी बड़ी कंपनियां इसमें महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं। इसी तरह, चीन ने भी एआई को अपनी राष्ट्रीय रणनीति का मुख्य हिस्सा बना लिया है। वह हर साल लगभग 22 अरब डॉलर रिसर्च, डेवलपमेंट और एप्लिकेशंस में खर्च करता है, साथ ही बड़े पैमाने पर एआई हब और टैलेंट पाइपलाइन भी तैयार कर रहा है। इसके विपरीत, भारत का एआई निवेश अभी भी तुलनात्मक रूप से कम है। सरकार ने 1.25 अरब डॉलर एआई पहल के लिए तय किए हैं, और 10,000 जीपीयू खरीदने की योजना बनाई है। माइक्रोसॉफ्ट का भारत के एआई और क्लाउड इन्फ्रास्ट्रक्चर में तीन अरब डॉलर का निवेश एक अच्छा कदम है। लेकिन यह अभी भी अमेरिका और चीन के निवेशों के मुकाबले काफी कम है।


निवेश क्यों जरूरी

परम सुपरकंप्यूटर जैसे प्रयास सराहनीय हैं, लेकिन भारत का कंप्यूटेशनल इन्फ्रास्ट्रक्चर अब भी वैश्विक मानकों से पीछे है। बड़े पैमाने पर एआई मॉडल्स को प्रशििक्षत करने के लिए भारी संसाधनों की आवश्यकता होती है। भारत को उच्च-प्रदर्शन कंप्यूटिंग केंद्र, किफायती क्लाउड इन्फ्रास्ट्रक्चर और व्यवसायों, स्टार्टअप और शोधकर्ताओं के लिए जीपीयू और टीपीयू तक आसानी से पहुंच सुनिश्चित करनी होगी।


प्रतिभा विकास

भारत प्रतिवर्ष बड़ी संख्या में इंजीनियर तैयार करता है, लेकिन उनमें से बहुत कम एआई में विशेषज्ञता हासिल करते हैं। अमेरिका और चीन जैसे देश एआई में रिस्किलिंग और अपस्किलिंग पर काफी निवेश करते हैं। भारत को भी बड़े स्तर पर लोगों को एआई में प्रशिक्षित करने के लिए पहल करनी होगी। विश्वविद्यालयों में एडवांस एआई रिसर्च को बढ़ावा देकर भारत से मजबूत वैश्विक एआई लीडर्स पैदा किए जा सकते हैं।


बुनियादी क्षेत्रों में एआई का उपयोग

कृषि, स्वास्थ्य और शिक्षा जैसे क्षेत्रों में एआई का उपयोग बड़े बदलाव ला सकता है। यह फसल की पैदावार का अनुमान लगा सकता है, बीमारियों का समय रहते पता लगा सकता है, और व्यक्तिगत शिक्षण समाधान प्रदान कर सकता है। लेकिन इन क्षेत्रों में एआई को लागू करने के लिए केवल तकनीकी निवेश ही नहीं, बल्कि जागरूकता भी जरूरी है।


सीख का रास्ता

चीन ने एआई जोन तैयार किए हैं, जो उच्च गुणवत्ता वाली बुनियादी सुविधाओं से युक्त हैं। साथ ही, वैश्विक प्रतिभाओं को आकर्षित करने और रिसर्च को बढ़ावा देने के लिए कई प्रोत्साहन भी दिए जा रहे हैं। भारत भी बंगलूरू, पुणे, जयपुर और हैदराबाद जैसे शहरों में ऐसे एआई हब बना सकता है। अमेरिका में निजी क्षेत्र एआई के विकास में प्रमुख भूमिका निभाता है। भारत का निजी क्षेत्र भी इस क्षेत्र में काफी संभावनाएं रखता है, लेकिन अब तक बड़े पैमाने पर भागीदारी नहीं हुई है। मजबूत प्रोत्साहन और सार्वजनिक-निजी भागीदारी से इस क्षमता को उजागर किया जा सकता है। यूरोप नैतिक एआई पर जोर देता है, जहां तकनीक सामाजिक जरूरतों के अनुसार ढली होती है। भारत भी अपनी विविध जनसंख्या के साथ ऐसे एआई समाधानों में निवेश कर सकता है, जो समावेशी, पारदर्शी और सभी के लिए सुलभ हों।


निवेश के प्रमुख क्षेत्र

छोटे व मझोले उद्योग (एमएसएमई) एआई की मदद से स्वचालन व दक्षता में सुधार कर सकते हैं। भारत में एआई स्टार्टअप्स उभर रहे हैं, पर उन्हें फंडिंग, मेंटरशिप और आसान नियमों की जरूरत है। भारत अपनी क्षेत्रीय भाषाओं के लिए एआई सिस्टम विकसित करने में निवेश करे, ताकि ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में समावेशिता सुनिश्चित की जा सके। शुद्ध एआई शोध के लिए अधिक संसाधन आवंटित किए जाने की जरूरत है, क्योंकि इससे बुनियादी एआई विज्ञान में नई खोजों को प्रोत्साहन मिलेगा। जैसे-जैसे भारत एआई क्षेत्र का विस्तार करता है, नियम और नैतिकता सुनिश्चित करने के लिए निवेश करना आवश्यक होगा।
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निष्कर्ष

भारत के पास वैश्विक एआई नेता बनने की अपार संभावना है। यह तभी संभव है, जब हम बड़े पैमाने पर निवेश करें। 2027 तक एआई इन्सान से कई क्षेत्रों में बेहतर होगा। अगर भारत अभी से निवेश और नवाचार पर ध्यान नहीं देगा, तो वह इस बदलाव में पिछड़ सकता है। भारत को उद्योग विशेषज्ञों और सरकार के साथ मिलकर एक थिंक टैंक बनाने की पहल करनी चाहिए, जो न केवल दीर्घकालिक रणनीतियों पर काम करेगा, बल्कि विभिन्न क्षेत्रों में एआई को अपनाने के लिए नीतियों और दिशानिर्देशों को भी तैयार करेगा।

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