कांग्रेस अध्यक्ष (अंतरिम) के रूप में सोनिया गांधी की वापसी एक अर्थ में विचित्र और नौटंकी लग सकती है, लेकिन मौजूदा परिस्थिति में कांग्रेस के लिए यही सबसे उपयुक्त हो सकता था। सोनिया गांधी के सामने फिलहाल सबसे बड़ी चुनौती यह है कि उनके पास वक्त बिल्कुल नहीं है। सवाल यह है कि क्या वह हरियाणा में अपनी पार्टी को टूटने से बचा सकती हैं, जहां एक वरिष्ठ कांग्रेस नेता नेतृत्व की अवज्ञा कर आगामी 18 अगस्त को रोहतक में एक रैली करने जा रहे हैं।
लोगों और मीडिया की आलोचना के बावजूद सबसे पुरानी पार्टी द्वारा सोनिया गांधी को 'दोबारा' चुनने के 'सिद्धांत' को समझना आवश्यक है। सच यह है कि कांग्रेस का राजनीतिक नेतृत्व तीन गांधियों-यानी सोनिया, राहुल और प्रियंका के पास ही रहना था।