अफ्रीका में पाए गए कैंसर के एक चौथाई मामले प्रोस्टेट कैंसर के हैं। अध्ययन का उद्देश्य प्रोस्टेट कैंसर की आनुवंशिक संरचना के उन पहलुओं का खुलासा करना था, जो अफ्रीकी मूल के पुरुषों में खास थे। तथ्यों से पता चलता है कि प्रोस्टेट कैंसर में आनुवंशिक कारक ज्यादा योगदान देते हैं। दो ग्रुपों में आनुवंशिक जोखिम ज्यादा हो सकता है : जीन में दुर्लभ आनुवंशिक उत्परिवर्तन होते हैं, जैसे कि बीआरसीए1 और बीआरसीए2, जिन्हें कैंसर के विकास के बढ़ते जोखिमों से जोड़ा गया है। बीआरसीए2 में उत्परिवर्तन विशेष रूप से अधिक आक्रामक प्रोस्टेट कैंसर के विकास के उच्च जोखिम से जुड़े हुए हैं। गंभीर बीमारी होने के बावजूद अफ्रीकी आबादी में प्रोस्टेट कैंसर के आनुवंशिक अध्ययन सीमित हैं। दरअसल, इन अध्ययनों के लिए तकनीक काफी महंगी होती है और विशेष उपकरणों की जरूरत पड़ती है, जो अफ्रीका में दुर्लभ हैं। उपसहारा अफ्रीकी क्षेत्र के कई क्षेत्रों में प्रोस्टेट कैंसर के लिए आनुवंशिकता को लेकर यह बहुत बड़ा अध्ययन है।
दुनिया की सभी आबादियों से ज्यादा पुरानी अफ्रीकी आबादी विविधिताओं से भरी पड़ी है और यह होमो सेपियंस की उत्पत्ति का स्थान भी है। अध्ययन में 3,963 प्रोस्टेट कैंसर के और 3,509 इसके नियंत्रण के मामले शामिल थे। हमने प्रोस्टेट कैंसर की बढ़ती घटनाओं के साथ मजबूत संबंध वाले तीन लोकी (आनुवंशिक क्षेत्र) की पहचान की। इन लोकी के भीतर प्रमुख संकेत अफ्रीकी आबादी में आम थे, लेकिन गैर अफ्रीकी आबादी में लगभग अनुपस्थित। प्रोस्टेट कैंसर के खतरे में योगदान देने वाले आनुवंशिक भाग भौगोलिक जनसंख्या के अनुसार भिन्न होते हैं। हालांकि ये तीन लोकी अन्य आबादियों में भी मिले हैं, लेकिन अफ्रीकी आबादी का मामला अनूठा है। हमारे निष्कर्ष आनुवंशिक उपकरणों के विकास का मार्ग प्रशस्त करते हैं, जो लोगों को उनके जोखिम की स्थिति के आधार पर वर्गीकृत कर सकते हैं। (-द कन्वर्सेशन से)