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उपलब्धि और चुनौती: भारत में फलों व सब्जियों की प्रति व्यक्ति उपलब्धता बढ़ी, खाद्य सुरक्षा में लंबा सफर बाकी

अमर उजाला Published by: दीपक कुमार शर्मा Updated Mon, 16 Dec 2024 04:29 AM IST

सार

एसबीआई की शोध रिपोर्ट के अनुसार पिछले एक दशक में फल-सब्जियों की प्रति व्यक्ति उपलब्धता में उल्लेखनीय बढ़ोतरी बेशक एक उपलब्धि है, पर इनका एक बड़ा हिस्सा गलत रख-रखाव के चलते नष्ट हो जाता है। लिहाजा, खाद्य सुरक्षा में आत्मनिर्भर बनने के लिए अभी लंबा सफर तय करना है।
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सांकेतिक तस्वीर - फोटो : अमर उजाला


दरअसल, आज का भारत परंपरागत कृषि से आगे बढ़कर नवाचार और तकनीकी उपायों को अपनाने में सफल हो रहा है। किसानों द्वारा ड्रिप सिंचाई, उच्च उपज वाली फसलों को प्राथमिकता देना और स्मार्ट खेती जैसी विधियों को अपनाना इसके मुख्य कारण हैं। इसके अतिरिक्त, प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि, कृषि अवसंरचना कोष और किसान उत्पादक संगठन जैसी पहलों ने किसानों को बेहतर संसाधन तो दिए ही हैं, उनकी बाजारों तक पहुंच भी सुनिश्चित की है। लोगों में स्वास्थ्य व पोषण को लेकर बढ़ती जागरूकता ने भी फलों व सब्जियों की मांग को प्रोत्साहित किया है। लोगों के आहार पैटर्न में यह जो बदलाव दिख रहा है, वह कोरोना महामारी के दौर से ही दिखना शुरू हो गया था। हालांकि रिपोर्ट में असामान्य होती मौसम की स्थितियों से होने वाले नुकसानों पर भी प्रकाश डाला गया है।


भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर) के अनुसार, अनाज के उत्पादन के वक्त में तापमान में तीस डिग्री सेल्सियस से एक डिग्री भी ज्यादा वृद्धि होने पर गेहूं की पैदावार में तीन से चार फीसदी की कमी आ सकती है, जो बेहद चिंताजनक है। लेकिन इससे भी ज्यादा चिंताजनक तथ्य यह है कि 30 से 35 फीसदी फसल कटाई, भंडारण, परिवहन व पैकेजिंग के गलत तौर-तरीकों के चलते नष्ट हो जाती है। देश के 60 फीसदी कोल्ड स्टोरेज केवल चार राज्यों- गुजरात, पश्चिम बंगाल, उत्तर प्रदेश और पंजाब में हैं। भारत फिलहाल फल व सब्जियों के उत्पादन के मामले में आत्मनिर्भर है, लेकिन बढ़ती जनसंख्या और भविष्य की जरूरतों के मद्देनजर अब आत्मनिर्भरता के साथ आगे बढ़ने का समय है। फल-सब्जियों की उपलब्धता बढ़ना सकारात्मक संकेत है, लेकिन खाद्य सुरक्षा में आत्मनिर्भर बनने की दिशा में अभी लंबा सफर तय करना बाकी है।

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