न्यूयॉर्क प्रेस्बिटेरियन व कोलंबिया यूनिवर्सिटी इरविंग मेडिकल सेंटर की मनोवैज्ञानिक एरिन एंगल के अनुसार, ‘कुछ समय तक चुप रहना अच्छा लग सकता है, लेकिन लंबे समय तक यह चुप्पी संबंधों पर भारी पड़ सकती है।’ मैंने विशेषज्ञों से जानना चाहा कि अगर आपको चुप रहना पड़ रहा है या कोई और चुप रहना चाहता है, तब क्या करें? न्यूयॉर्क प्रेस्बिटेरियन अस्पताल में क्लिनिकल एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. गेल साल्ट्ज कहती हैं, ‘कुछ लोग सोचते हैं कि चुप रहना विवाद से छुटकारा पाने का सहज तरीका है, लेकिन चुप्पी साधना एक तरह से सजा है, भले ही आप इसे स्वीकारें या नहीं।’ डॉ. साल्ट्ज कहती हैं कि जिस व्यक्ति को जान-बूझकर बहिष्कृत किया जाता है, उसके अंदर चिंता, डर और परित्याग की भावना जन्म लेने लगती है, जो आत्म-संदेह, आत्म-दोष और आत्म-आलोचना के नकारात्मक विचारों को बढ़ाती है। डॉ. विलियम्स कहते हैं कि जब सामने वाला आपसे बात करना चाहता है, तो भले ही तत्काल बात न करे, लेकिन उससे कह सकते हैं कि कुछ समय बाद बात करेंगे। यदि बात नहीं की, तो यह काफी घातक हो सकता है।
विशेषज्ञ कहते हैं कि चुप्पी को तोड़ते हुए, एक-दूसरे के प्रति सहानुभूति की भावना रखें और बातचीत के दौरान अपनी भूमिका को भी समझें। टॉम और मेरे बीच, यह चुप्पी कुछ घंटों तक चली, लेकिन अब आगे से कोशिश करूंगी कि चुप रहने के बजाय उससे बात कर मामले को सुलझाऊं। खैर, जब मैं काम से लौटकर घर आई, तो टॉम ने मुझे एक खास तरह के बिस्कुट का बैग दिया, जो मुझे बेहद पसंद है। हालांकि, यह एक तरह से रिश्वत थी, फिर भी मैं कहना चाहूंगी कि आपको जो भी बिस्कुट मिलें, उन्हें स्वीकार करें, ताकि इस चुप्पी को तोड़ा जा सके। आखिर इन्हीं बिस्कुटों में तो जिंदगी है।