छठी शताब्दी में कन्फ्यूशियस ने अपने पुत्र कांग ली को समकालीन चिंतक चेन जिकिन के पास शिक्षा लेने के लिए भेजा। दोनों रहस्यदर्शियों के बारे में कहा जाता है कि किसी ने उन्हें संवाद करते हुए नहीं देखा। मगर दोनों एक-दूसरे का बहुत आदर करते थे। वे एक-दूसरे पर किसी तरह की टिप्पणी नहीं करते थे।
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कांग ली जब पढ़ने गया, तो चेन ने पूछा, क्या तुम्हारे पिता ने तुम्हें ऐसा कुछ भी सिखाया है, जो हम नहीं जानते? कांग ने जवाब दिया, नहीं, लेकिन एक बार जब मैं अकेला था, तो उन्होंने मुझसे पूछा कि मैं कविता पढ़ता हूं या नहीं। मेरे ‘न’ कहने पर वह बोले कि मुझे कविता पढ़नी चाहिए, क्योंकि यह आत्मा को दिव्य प्रेरणा के पथ पर अग्रसर करती है। चेन ने पूछा, इसके अलावा उन्होंने कभी कुछ कहा? कांग ने कहा, नहीं, लेकिन एक बार उन्होंने मुझसे देवताओं को अलंकृत करने की रीतियों के बारे में पूछा, जिसे मैं नहीं जानता था।
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चेन ने उत्सुकता जताई, फिर? उन्हें लगा कि कन्फ्यूशियस ने कांग को डांटा-डपटा होगा। मगर कांग से इस बारे में कुछ न सुनकर वह उदास हो गए। तब उन्होंने फिर पूछा, बाद में कभी उन्होंने इस बारे में पूछा तो होगा कि कविता या देवताओं को सजाने के बारे में तुम क्या कर रहे हो? कांग ने कहा, उन्होंने यह देखने के लिए कभी मुझ पर नजर नहीं रखी कि मैं उनकी आज्ञाओं का पालन कर रहा हूं या नहीं।
कांग के जाने के बाद चेन ने खुद से कहा, मैंने कांग ली से एक प्रश्न पूछा और मुझे तीन संदेश मिले। काव्य और देवताओं को अलंकृत करने के बारे में तो मुझे कुछ जानने को मिला ही, महत्वपूर्ण सीख यह है कि सदाशयी व्यक्ति दूसरों की ईमानदारी की छानबीन नहीं करते।