हिमालय का दृश्य जब आखों के सामने होता है, तो इसका मतलब समझ लीजिए कि यह अधिक गर्मी पैदा नहीं करता है। चारों ओर के पहाड़ पर बर्फ की सफेद चांदी दिखाई देगी। चौड़े पत्ते के जंगल, असंख्य जीव-जंतुओं के घर, सीढ़ीदार खेत, नदियां, गदेरे और संकरी सड़कें नजर आएंगी। यहां के ऊंचाई के क्षेत्रों में साधु, संतों की तपस्या की गुफाएं, मंदिर, मस्जिद, गुरुद्वारे भी मौजूद हैं।
लेकिन अब हिमालय का यह स्वरूप बदल रहा है। यहां के गांवों में गर्मी पड़ने लगी है। पखें, कूलर आदि चल रहे हैं। शीतकाल में बर्फ गिरते ही जल्दी पिघल जाती है। पानी के स्रोत सूख रहे हैं। जैव विविधता को नुकसान हो रहा है। कृषि उपज घट रही हैं। जैविक खेती पर रासायनिक खादों का खतरा है। मौसम एक महीना पीछे हट गया है। हिमालय बाढ़ भूस्खलन, भूकंप के लिए अति संवेदनशील बन गया है। यहां बसे हुए हजारों गांवों पर भूस्खलन का खतरा मंडरा रहा है। लोग रोजी-रोटी के लिए पलायन कर रहे हैं। नदियों और सड़कों के किनारे बसे हुए कई गांव व शहर अपना अस्तित्व खो रहे हैं।