जमीयत-ए-उलेमा-ए-हिंद के अध्यक्ष मौलाना अरशद मदनी की राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक मोहन भागवत के साथ हुई बातचीत सामान्य घटना नहीं है। डेढ़ घंटे से ज्यादा चली इस मुलाकात के बारे में संघ ने कोई बयान नहीं दिया है, पर मदनी ने संघ प्रमुख को कहा कि इस समय मुसलमानों में भीड़ की हिंसा तथा तत्काल तीन तलाक के खिलाफ बने कानून को लेकर चिंता का माहौल है, तथा एक बड़े समुदाय में भय पैदा कर देश का विकास नहीं हो सकता। देश के भविष्य की दृष्टि से इस बैठक में हुई बातचीत का महत्व तो है ही, इन दोनों की मुलाकात का महत्व उससे ज्यादा है।
आगे निरंतर संवाद पर दोनों नेताओं में सहमति बनी है। जो लोग सामाजिक-सांप्रदायिक एकता और शांति की कामना करते हैं, वे इस पहल से प्रसन्न होंगे। अगर वाकई दोनों पक्ष संवाद में रुचि रखते हैं तथा सांप्रदायिक सद्भाव के लिए मिलकर काम करना चाहते हैं, तो आलोचनाओं, विरोधों, उपहास, उत्तेजना से निरपेक्ष रखते हुए आगे बढ़ना होगा। संघ और मुस्लिम संगठनों के बीच पहले भी संवाद हुए हैं, पर हमेशा कुछ शक्तियों ने उन्हें विफल कर दिया। पूर्व सरसंघचालक स्व. कुपहल्ली सीतारमैया सुदर्शन की ओर से इसकी लगातार कोशिशें की गईं। वह संवाद जारी नहीं रहा। किंतु सुदर्शन की सहमति से संघ के प्रचारक इंद्रेश कुमार ने राष्ट्रीय मुस्लिम मंच नामक संगठन खड़ा किया, जो अपनी सीमाओं में लगातार सक्रिय है।