फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

कर्म का स्थान सबसे ऊपर

Mon, 13 Aug 2012 12:00 PM IST
Yashwant Vyas
विज्ञापन
विज्ञापन
धर्मग्रंथों और नीतिशास्त्रों में कहा गया है कि दिन भर कर्मकांड करने वाला व्यक्ति भले ही खुद को सबसे बड़ा भक्त माने, पर वह आत्मिक संतुष्टि कभी प्राप्त नहीं कर सकता। आत्मसंतुष्टि पाने के लिए जरूरी है कि कर्म को महत्व दिया जाए। अनवरत कर्म करने वाला और ईमानदारी से दैनिक जीवन बिताने वाला ही सच्च भक्त है और उससे मिलने के लिए ईश्वर खुद-ब-खुद तत्पर हो उठते हैं।
विज्ञापन


भगवान बुद्ध अपने एक किसान भक्त की प्रार्थना स्वीकार कर उसके गांव पहुंचे। किसान ने उनके प्रवचन का आयोजन किया। अचानक किसान का बैल बीमार हो गया। किसान यह जानता था कि यदि बैल को तुरंत चिकित्सक को नहीं दिखाया गया, तो उसके प्राण नहीं बचाए जा सकते। इसलिए वह प्रवचन में न जाकर बैल को लेकर चिकित्सक के पास चला गया।

गांव के कुछ लोगों ने भगवान बुद्ध से कहा, यह किसान कितना स्वार्थी है। आपके प्रवचन का आयोजन कर स्वयं स्वार्थ के वशीभूत होकर प्रवचन में नहीं आया। भगवान बुद्ध ने कहा, किसान ने प्रवचन सुनने की जगह कर्म को महत्व देकर सिद्ध कर दिया है कि वह मेरी शिक्षा ठीक ढंग से समझ गया है। मेरे प्रवचन का सार यही है- विवेक से काम लो कि कौन-सा कार्य पहले किया जाना जरूरी है। यदि किसान बीमार बैल को छोड़कर प्रवचन में आ जाता और बैल बिना दवा के मर जाता, तो मेरा प्रवचन देना व्यर्थ हो जाता। इस बात को सुनकर सभी की आंखें खुल गईं।
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें