कई साल बीत गए। वाल्जैक अखबार के रिपोर्टर बने। 2010 में वह ग्रेजुएट स्कूल की पढ़ाई के लिए मैनहट्टन चले गए। वह वहां सिर्फ एक सेमेस्टर ही पढ़ पाए, लेकिन उस शहर में बिताए उस पतझड़ के मौसम ने उनकी पुरानी यादें ताजा कर दीं। उन्होंने आतंकी हमलों की नौवीं बरसी देखी और उस कैमरे के बारे में सोचा। उन्होंने इतने वर्षों तक अखबार की वह कतरन संभालकर रखी थी। 2021 में उन्होंने एक पॉडकास्ट शुरू किया था, जिसका नाम था मिसिंग ऑन 9/11। इसके एक एपिसोड में उन्होंने उन तस्वीरों की सूची बताई, जो टावरों की अलग-अलग मंजिलों से ली गई थीं। उन तस्वीरों को खोजने के दौरान, वे ऐसे लोगों के एक समूह से जुड़े, जो उस खास दिन के अनदेखे फुटेज को खोजने और उन्हें सुरक्षित रखने में लगे थे।
जोनाथन वाल्जैक ने जो कहानी काटकर रखी थी, उसे बाल्टीमोर सन की रिपोर्टर लॉरा सुलिवन ने लिखा था। 2003 में, उन्होंने क्वांटिको, वर्जीनिया में एफबीआई की विस्फोटक इकाई के स्टोरेज सेंटर में समय बिताया, जो 11 सितंबर की घटनाओं से जुड़े सबूतों को रखने की मुख्य जगह थी। सुलिवन ने लिखा, ‘यूनिट के सदस्यों को एक आदमी की जेब में डिस्पोजेबल कैमरा मिला, जिसने टावरों में से एक से छलांग लगाई थी। जब महीनों बाद उन्होंने फिल्म डेवलप की, तो जांचकर्ताओं को उस सुबह उस आदमी के अनुभव की एक रोंगटे खड़े कर देने वाली कहानी मिली। तस्वीरों में वह आदमी निर्माण कर्मचारी लगता है। वह खिड़की पर खड़ा है और उसके पीछे दूसरा टावर जल रहा है। इन तस्वीरों में उसकी खींची हुई अपनी और कुछ दूसरों की तस्वीरें भी हैं। इनमें छलांग लगाने वाले दूसरे लोग भी गिरते हुए दिख रहे हैं।’ जांच के लिए ठोस सुराग मौजूद थे। उस सुबह के बारे में कई लेख, किताबें, डॉक्यूमेंट्री और फिल्में बनीं। किसी को भी लग सकता है कि अब इसमें क्या नया है? लेकिन, टावरों के अंदर की बहुत कम तस्वीरें ही देखी गई हैं। जिन मंजिलों पर विमान टकराए थे, उनसे ऊपर की मंजिलों की कोई भी तस्वीर सामने नहीं आई है।
मिसिंग ऑन 9/11 पॉडकास्ट के दौरान, वाल्जैक ने एक बोनस एपिसोड बनाया, जिसका नाम था द डिस्पोजेबल कैमरा। और, उन्होंने सुलिवन को ही गेस्ट के तौर पर बुलाया। सुलिवन ने कहा, ‘वह हल्के भूरे रंग के कपड़े पहने एक आदमी था, जो खिड़की के पास खड़ा था। उन तस्वीरों में एक तरह का भावनात्मक खिंचाव था, क्योंकि वे उस दुखद पल में ली गई थीं।’
जब वाल्जैक ने 11 सितंबर के फुटेज की और गहराई से जांच-पड़ताल की, तो किसी ने उन्हें एक युवा से संपर्क करने का सुझाव दिया, जिन्हें इस मामले का जानकार माना जाता था। उनका नाम एंड्रयू बॉस्टन था। 11 सितंबर को बॉस्टन सिर्फ पांच साल के थे, लेकिन उन्हें वह दिन एक खास डर की वजह से याद है। उनके पिता काम के सिलसिले में ईस्ट कोस्ट गए हुए थे और उन्हें उसी दिन फ्लाइट से घर लौटना था, पर उनसे कोई संपर्क नहीं हो पा रहा था। बॉस्टन बताते हैं, ‘मैंने घर पर साउथ टावर को गिरते हुए देखा था। उसके बाद मुझे और मेरे भाई को बेसमेंट में भेज दिया गया।’ जैसा कि बॉस्टन को आज भी याद है, ऊपर आसमान में जोरदार आवाज हुई। वह एक बहुत बड़ा विनान था। कुछ घंटों बाद, बॉस्टन के पिता ने घर फोन किया-वे सुरक्षित थे।
दो-तीन साल पहले, बॉस्टन ने 11 सितंबर की घटनाओं के फुटेज इकट्ठा करने और उन्हें व्यवस्थित करने में काफी समय देना शुरू किया। उन्होंने रेडिट पर 9/11 आर्काइव नाम का एक समुदाय बनाने में भी मदद की। वह बहुत बारीकी से यह समझना चाहते थे कि इमारतें क्यों ढहीं? उन्होंने यह समझने की कोशिश की कि कुछ जगहों से बाहर निकलने के रास्ते मौजूद थे, जबकि दूसरी जगहों पर ऐसा नहीं था। उन्होंने समझाया, ‘यह न समझने की कोशिश करना कि ऐसा क्यों हुआ, एक तरह से नुकसान ही है। इससे इतिहास खो जाता है।’ लोग अब भी घटना के वीडियो फुटेज ढूंढ रहे हैं।
पिछले ही साल, एडवर्ड स्फेराजा नाम के एक कॉन्ट्रैक्टर का रिकॉर्ड किया हुआ एक नया वीडियो कैसेट मिला, जिसमें एक दिल दहला देने वाला मंजर था। उसे ऑनलाइन पोस्ट किया गया। वीडियो की शुरुआत में लोग ऊपर जलती हुई एक इमारत को देख रहे हैं, फिर दूसरी को, और आखिर में, अचानक, हर तरफ राख ही राख छा जाती है। स्फेराजा अपनी वैन के पास लौटते हैं, तो देखते हैं कि अंदर दो अजनबी पनाह लेने के लिए बैठे हैं। स्फेराजा ने पिछले हफ्ते एक इंटरव्यू में कहा कि मैं बस इतना चाहता हूं कि लोगों को पता चले कि जब वे इसकी तुलना मून लैंडिंग से करते हैं, तो मैं वहां मौजूद था। मैंने उसे महसूस किया, उसे अनुभव किया और उसे जिया है।
वाल्जैक को मलबे में इस्तेमाल होने वाले उस खास कैमरे की तलाश में कोई कामयाबी नहीं मिल रही थी। बार-बार एफबीआई को भेजी गई उनकी अर्जियां ठुकरा दी जाती थीं। आखिरकार, पिछले साल वाल्जैक ने फेडरल कोर्ट में ब्यूरो के खिलाफ केस कर दिया। एक और व्यक्ति था, जिससे संपर्क किया जा सकता था: वह एफबीआई एजेंट, जो क्वांटिको में एविडेंस लैब चलाता था और जिसने 2003 में सुलिवन को तस्वीरें दिखाई थीं। उनका नाम डोनाल्ड सैच्टलेबेन था। सैच्टलेबेन ने 1993 में आतंकवादियों द्वारा वर्ल्ड ट्रेड सेंटर पर बमबारी के बाद न्यूयॉर्क में सबूत इकट्ठा किए। वाल्जैक ने उन्हें ढूंढ निकाला और डिस्पोजेबल कैमरे की तस्वीरों के बारे में पूछा। पर, सैच्टलेबेन ने जवाब दिया, ‘मैं आपकी मदद नहीं कर सकता।’
कैमरे की अपनी खोज जारी रखते हुए, वाल्जैक ‘ग्राउंड जीरो’ के मलबे में मिले दूसरे तथाकथित ‘रबल कैमरों’ (मलबे में दबे कैमरों) के जानकार बन गए हैं। उन खोजों से ज्यादा अच्छे नतीजे मिले हैं। उन्होंने ‘ग्राउंड जीरो’ पर मिले एक प्रोफेशनल-ग्रेड कैमरे की चीजों की गहराई से जांच की और अपनी उस जांच को 32 फ्रेम्स: ए 9/11 मिस्ट्री नाम की एक डॉक्यूमेंट्री में बदल दिया। यह इसी महीने रिलीज हुई है। अक्सर उनसे सवाल पूछा जाता है कि आखिर उन्होंने यह सब क्यों किया। वाल्जैक ने कहा, ‘9/11 से तीन दिन पहले ही मैं 13 साल का हुआ था। यह मेरे बड़े होने का एक अहम पल था।’ उस घटना ने उन्हें झकझोर कर रख दिया था। इन हमलों ने उन्हें तुरंत साल 2000 की उस याद में पहुंचा दिया, जब वह 11 साल की उम्र में अपने दादा-दादी के साथ उन टावरों को देखने गए थे। पच्चीस साल बाद भी, वाल्जैक बार-बार उन पलों और उस दिन की यादों में खो जाते हैं। वह आज भी उस पहेली के टुकड़ों को जोड़ने की कोशिश कर रहे हैं, जो दुनिया ने उन्हें तब दी थी, जब वह बच्चे थे।