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निरंतरता, स्थायित्व और दृढ़ इच्छाशक्ति से सुशासन

अतुल कुमार गुप्ता, आईएएस (सेवानिवृत्त) पूर्व मुख्य सचिव Published by: Vikas Kumar Updated Mon, 04 Jul 2022 08:15 AM IST

सार

यूपी की राजनीतिक पृष्ठभूमि में 37 वर्ष बाद किसी चुनाव में एक सरकार को दोबारा मौका मिलना इस बात का द्योतक है कि प्रदेश के लोगों ने दूरगामी और स्थायी विकास के लिए राजनीतिक स्थिरता को चुना है।
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विकास एक सतत प्रक्रिया तथा साधन है जिसके लिए राजनीतिक तथा नीतिगत सोच का स्थायित्व जरूरी है। विकास के दूरगामी निर्णयों के क्रियान्वयन के लिए आवश्यक है कि राजनीतिक नेतृत्व में स्थिरता हो और विकास के प्रति दृष्टिकोण में भी समानता हो। यूपी में हाल में संपन्न हुए विधानसभा चुनाव के परिणाम दशकों में ऐतिहासिक हैं। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में दोबारा बनी सरकार के प्रथम 100 दिन पूरे होने पर इस स्थायित्व और निरंतरता का महत्व प्रदेशवासियों को स्पष्ट रूप से दिख रहा है।

प्रदेश की राजनीतिक पृष्ठभूमि में 37 वर्ष बाद किसी चुनाव में एक सरकार को दोबारा मौका मिलना इस बात का द्योतक है कि प्रदेश के लोगों ने दूरगामी और स्थायी विकास के लिए राजनीतिक स्थिरता को चुना है। सरकार की दूसरी पारी के कार्यकाल के प्रथम 100 दिन की उपलब्धियां इस बात के संकेत हैं कि सुशासन, पक्का इरादा, भेदभाव रहित नीतियां, डबल इंजन (यानी प्रदेश और केंद्र में एक ही पार्टी की सरकार) की गति के आधार पर प्रदेश की कई पहल तथा योजनाएं, कार्यक्रम और परियोजनाएं तेज गति से आगे बढ़ रही हैं। इसके लिए स्थिरता के अलावा योगी की सरकार ने जो दृढ़ राजनीतिक इच्छाशक्ति दिखाई वह प्रदेश के सुशासन तथा विकास का नया मानचित्र बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कारक है।



यूपी जैसे विशाल जनसंख्या तथा विविधता वाले प्रदेश के लिए यह आवश्यक है कि सरकार की नीतियां दीर्घकालीन लाभ तथा आवश्यकताओं की पूर्ति हेतु बनाई जाएं। पिछले कार्यकाल में मुख्यमंत्री योगी द्वारा शुरू की गई औद्योगिक विकास, निवेश प्रोत्साहन तथा रोजगार सृजन की योजनाओं का सकारात्मक प्रभाव दिखने लगा है। निरंतरता के इस मूलमंत्र के आधार पर मुख्यमंत्री ने हर विभाग को 100 दिन, छह माह और वार्षिक कार्ययोजना बनाने के निर्देश दिए, जिससे सरकार के काम में दक्षता और समयबद्धता लगातार बनी रहे।

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विकास एक सतत प्रक्रिया तथा साधन है जिसके लिए राजनीतिक तथा नीतिगत सोच का स्थायित्व जरूरी है। विकास के दूरगामी निर्णयों के क्रियान्वयन के लिए आवश्यक है कि राजनीतिक नेतृत्व में स्थिरता हो और विकास के प्रति दृष्टिकोण में भी समानता हो। यूपी में हाल में संपन्न हुए विधानसभा चुनाव के परिणाम दशकों में ऐतिहासिक हैं। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में दोबारा बनी सरकार के प्रथम 100 दिन पूरे होने पर इस स्थायित्व और निरंतरता का महत्व प्रदेशवासियों को स्पष्ट रूप से दिख रहा है।

प्रदेश की राजनीतिक पृष्ठभूमि में 37 वर्ष बाद किसी चुनाव में एक सरकार को दोबारा मौका मिलना इस बात का द्योतक है कि प्रदेश के लोगों ने दूरगामी और स्थायी विकास के लिए राजनीतिक स्थिरता को चुना है। सरकार की दूसरी पारी के कार्यकाल के प्रथम 100 दिन की उपलब्धियां इस बात के संकेत हैं कि सुशासन, पक्का इरादा, भेदभाव रहित नीतियां, डबल इंजन (यानी प्रदेश और केंद्र में एक ही पार्टी की सरकार) की गति के आधार पर प्रदेश की कई पहल तथा योजनाएं, कार्यक्रम और परियोजनाएं तेज गति से आगे बढ़ रही हैं। इसके लिए स्थिरता के अलावा योगी की सरकार ने जो दृढ़ राजनीतिक इच्छाशक्ति दिखाई वह प्रदेश के सुशासन तथा विकास का नया मानचित्र बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कारक है।

यूपी जैसे विशाल जनसंख्या तथा विविधता वाले प्रदेश के लिए यह आवश्यक है कि सरकार की नीतियां दीर्घकालीन लाभ तथा आवश्यकताओं की पूर्ति हेतु बनाई जाएं। पिछले कार्यकाल में मुख्यमंत्री योगी द्वारा शुरू की गई औद्योगिक विकास, निवेश प्रोत्साहन तथा रोजगार सृजन की योजनाओं का सकारात्मक प्रभाव दिखने लगा है। निरंतरता के इस मूलमंत्र के आधार पर मुख्यमंत्री ने हर विभाग को 100 दिन, छह माह और वार्षिक कार्ययोजना बनाने के निर्देश दिए, जिससे सरकार के काम में दक्षता और समयबद्धता लगातार बनी रहे।

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