हमारे वक्त के अशेष चिंतक राममनोहर लोहिया ने कहा है कि व्यक्ति का हो न हो, इतिहास का पुनर्जन्म होता है। लेकिन लगता है कि इतिहास का निरंतर ही होता है। कुरुक्षेत्र के महाभारत युद्ध का गर्भगृह कुरुसभा में होता है। महाभारत की नायिका का धृतराष्ट्र के पुत्रों ने चीरहरण करने की कोशिश की। कामुकता और हिंसा की मिली-जुली कुंठाओं के खिलाफ उत्तेजित पांडवों ने अपने चचेरे भाइयों के वंश का नाश किया। महाभारत मिथक हो या असलियत-वह मनुष्य के स्वभाव का वंशानुगत समयसिद्ध बयान जरूर है।
एक ओर देश में महिला नेतृत्व परवान चढ़ा है। हरियाणा के ही चारों ओर सत्ता-व्यवस्था के विरुद्ध संघर्ष करती वसुंधरा राजे राजस्थान में, मायावती उत्तर प्रदेश में, विद्या स्टोक्स हिमाचल में, महबूबा मुफ्ती जम्मू-कश्मीर में, राजिंदर कौर भट्टल पंजाब में, सुषमा स्वराज लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष की हैसियत में सक्रिय हैं। उनके कार्यक्षेत्रों से घिरे हरियाणा में स्त्रियों की हत्याएं, भ्रूण हत्याएं और आत्महत्याएं हो रही हैं। यह भी लोहिया ने ही लिखा था कि महाभारत का नायक कृष्ण है और नायिका कृष्णा। पर हरियाणा में स्त्री की अस्मिता के साथ कुत्सित खेल खेलने वालों के नाम चंद्रमोहन, गोपाल कांडा आदि-आदि क्यों हैं?
हरियाणा का जो भी मुख्यमंत्री होता है, वह धृतराष्ट्र का वंशज क्यों लगता है? कृष्ण ने ही स्वर्ग के राजा इंद्र को चुनौती देकर गोवर्द्धन पर्वत अपनी उंगली पर उठा लिया था। क्या इंद्र का अर्थ भूपेंद्र होता है?
जिस मथुरा और वृंदावन के आसपास कृष्ण ने रासलीलाओं अर्थात् उन्मुक्त, बल्कि उन्मत्त प्रेम को नागरिक संबंधों का आधार बनाया, वहां स्त्रियों को मोबाइल फोन रखने, अकेले बाजारों में जाने और आधुनिक वस्त्र पहनने पर पाबंदियां लगाई गई हैं। दुर्योधन और दुःशासन वगैरह द्रौपदी के शरीर को देखने के लिए उसे निर्वस्त्र करने की वही धींगा मुश्ती कर रहे थे, जो आज भी प्रत्येक बलात्कारी करता है। फतवा जारी करने वाले कूढ़मग्जता के चलते खुद बेलौस प्रेम नहीं कर पाए होंगे। अपनी निर्वीर्यता का बदला वे नौजवान बच्चों से लेते हैं।
अपनी बेटी, बहन और बहू को समाज की सुरक्षा के नाम पर गाजर-मूली की तरह काटने को जो लोग मर्दाना काम समझते हैं, उन्हें अपने घरों में वृहन्नला तथा शिखंडी की तसवीरें लगाकर उनकी पूजा करनी चाहिए।
अंगरेजी के प्रसिद्ध कवि ड्रायडन ने लिखा था, नन बट द ब्रेव डिजर्वस द फेयर। भारत में भी वीरभोग्या वसुंधरा जैसे मुहावरे गढ़े गए हैं। अलाउद्दीन खिलजी के लिए पद्मिनी हो या अकबर के लिए जोधा बाई-स्त्री के सौंदर्य और शरीर को राजसत्ता से जुड़ी वस्तु क्यों समझा जाता है? स्त्री कुंती बनकर पुरुष की बीमारी ढोए, गांधारी बनकर पति की अंधभक्ति करे। पांच पतियों को संभाले। उसी महाभारत में हजारों वर्ष से स्त्री को इतिहास का अभियुक्त, गुलाम, बल्कि कभी-कभी तो खूंटे से बंधी गाय बनाने के उपक्रम किए जाते हैं।
सोहनी-महिवाल, हीर-रांझा आदि के अमर प्रेम कथानक जिस धरती पर लिखे गए हैं, उससे सटे इलाकों में सबसे घिनौने और कायराना करतब दिखाए जा रहे हैं। यदि स्त्रियां पिछड़े या दलित वर्ग की हुईं, तो उन्हें पशुओं से भी बदतर हालत में पहुंचाए जाने की खबरें आती हैं। दिल्ली से सटे गुड़गांव में उच्च वर्ग तथा धनाढ्य किस्म के शोहदे लड़कियों और विवाहित औरतों तक के अपहरण और बलात्कार के अपराध दुर्योधन-शैली में कर रहे हैं।
हरियाणा की पुलिस ने कृष्ण की भूमिका के पाठ नहीं पढ़े। लड़कियों को हिदायतें दी जाती हैं कि वे अपनी रक्षा खुद करें। बेहतर हो कि वे भड़काऊ कपड़े न पहनें। दुर्योधन की जांघ को गदा से तोड़ डालने वाले पति भीम कहां होते हैं?
देश में कन्याओं की भ्रूणहत्या हो रही है। नवजात बेटियां मारी जा रही हैं। उन्हें भीख मांगने के लिए बेचा जा रहा है। छत्तीसगढ़ के पिछड़े इलाकों की स्त्रियां अन्य प्रदेशों में काम करने के लिए दलालों द्वारा ले जाई जाती हैं। फिर उनका चरित्र छीन लिया जाता है। मुंबई के अभिनेताओं से लेकर उत्तर भारत के ठेकेदारों के लिए पूरे देश से लड़कियां बटोरी जाती हैं।
वृंदावन की विधवाओं के रूप में जीवन का नरक भोगने तक ढोल-गंवार-शूद्र-पशु-नारी का रिकॉर्ड बजता रहता है। हरियाणा के राजनेताओं ने ताकतवर महिला प्रधानमंत्री की विरोधाभास में स्तुति गाई थी, ‘इंदिरा गांधी मत घबराना, तेरे साथ खड़ा हरियाणा।' इसी इलाके के वरिष्ठ राजनीतिज्ञ शेरसिंह की बेटी उज्ज्वला शर्मा के बेटे रोहित शेखर ने कद्दावर नेता नारायण दत्त तिवारी को अदालत में अपने पिता के रूप में पैदा किया।
स्त्री होना हिंसक पुरुषों के लिए शिकार होना क्यों है? हिंसक पुरुष वर्ग वोट बैंक का समानार्थी क्यों है? दलित महिलाएं बांदी, दासी बल्कि देवदासियां क्यों हैं? इक्कीसवीं सदी के राजपुरुष पांच हज़ार वर्ष पुरानी शैली के क्यों हैं? मुख्यमंत्री और प्रधानमंत्री के पदों में धृतराष्ट्र क्यों कुलबुलाता रहता है? संसद में बलात्कार की परिभाषा बदल देने भर से क्या स्त्रियां महफूज होने जा रही हैं?
स्त्री भी पुरुष का बलात्कार कर सकती है, ऐसा कहने के पीछे कौन-सी मानसिकता या निष्कर्ष है? कुरुक्षेत्र के बड़े मैदान में विदेशी होकर भारतीय हो चुकी महिला के हाथ में महाभारत की नकेल है। कुरुक्षेत्र नामधारी छोटे युद्ध मैदान में स्त्रियों का जिस्मानी और रूहानी कत्लेआम जारी है। इससे फिर लगता है डॉ लोहिया ने ठीक कहा था कि ‘मनुष्य का हो न हो, इतिहास का पुनर्जन्म जरूर होता है।'