स्वदेशी मानवरहित विमान (यूएवी) रुस्तम-एक हालिया परीक्षण में 11,500 फुट की ऊंचाई तक पहुंचकर अपनी अधिकतम ऊंचाई 22,000 फुट के और करीब आ गया है। यह उसका 14वां सफल परीक्षण था, और अब यह कयास तेज हो गए हैं कि आने वाले कुछ महीनों में (20वें परीक्षण तक) इसे सैन्य बेड़े में शामिल किया जा सकता है।
रुस्तम एक टोही विमान है, जिसे रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन (डीआरडीओ) ने विकसित किया है। इस विमान का जन्म नेशनल एयरोस्पेस लेबोरेटरीज के लाइट कनार्ड रिसर्च एयरक्राफ्ट प्रोजेक्ट से हुआ है। लिहाजा इसी परियोजना से जुड़े वैज्ञानिक प्रोफेसर रुस्तम बी डामानिया के नाम पर, जिनकी मौत 2001 में हुई थी, इसका नामकरण किया गया है।
रुस्तम-एक सेना के तीनों अंगों के लिए विकसित किया जा रहा है। इसका इस्तेमाल न सिर्फ निगरानी करने के लिए होगा, बल्कि किसी लक्ष्य तक पहुंचने, संचार प्रक्रिया में भाग लेने, युद्ध में हुए नुकसान का आकलन करने और खुफिया संकेत आदि जुटाने में भी किया जाएगा। यही वजह है कि इसके तीन रूप विकसित किए जा रहे हैं, रुस्तम एक, रुस्तम दो और रुस्तम एच। बेशक अभी रुस्तम-एक के विकसित करने को लेकर डीआरडीओ गंभीर है, पर वह इसके दूसरे संस्करण और रुस्तम-एच पर भी गंभीरता से काम कर रहा है।
रुस्तम-एक ने पहली उड़ान 11 नवंबर, 2009 को भरी थी, जबकि उम्मीद है कि फरवरी, 2014 से रुस्तम-दो का परीक्षण भी शुरू हो जाएगा। रुस्तम में कई तरह की सुविधाएं हैं। इंफ्रारेड कैमरे से लैस यह विमान 24 से 36 घंटे तक अनवरत हवाई चक्कर लगा सकता है। यह अधिकतम 225 किलोमीटर प्रति घंटा की रफ्तार से उड़ सकता है।