जब मैं छोटा-सा बच्चा था, तो साइंस फिक्शन (विज्ञान कथा) ही सूचना प्राप्त करने का मेरा पहला स्रोत था। उन दिनों विज्ञान कथा का सांस्कृतिक प्रवाह बहुत कम था। विज्ञान कथाओं का एक उदारवादी प्रभाव मुझ पर यह हुआ कि जब मैं किशोरावस्था में था, तो हर तरह के अजीब आंकड़ों से जूझने की मुझमें क्षमता विकसित हो गई थी और इसने मुझे यह एहसास भी कराया कि मैं दुनिया से अलग-थलग नहीं हूं।
कहानियां एक तरह से भ्रम होती हैं, जो कई छोटे, पारंपरिक प्रतीकात्मक चीजों से बनती हैं और दूसरे के दिमाग में एक दृष्टिकोण पैदा करती हैं। जब मैंने कहानियां लिखनी शुरू की, तो मुझे निश्चित तौर पर पता था कि मेरी कहानियों को विज्ञान कथा के रूप में प्रकाशित किया जाएगा। लेखन से पहले मैं कहानी का ताना-बाना नहीं बुनता हूं। कहानी वास्तव में लिखने के दौरान ही पैदा होती है।
यही वजह है कि मैं कभी पटकथा (स्क्रीन प्ले) लेखन का काम नहीं कर सका। पटकथा लिखने के लिए आपको यह बताना होता है कि आगे क्या-क्या होने वाला है। कोई भी किताब लेखक के अवचेतन और पाठकीय प्रतिक्रिया के सामंजस्य से ही तैयार होती है।
मैं विज्ञान कथाओं को और ज्यादा स्वाभाविक बनाना चाहता हूं। इनमें विवरण की काफी कमी है। इनमें प्रौद्योगिकी का वर्णन इतनी चतुराई और सफाई से किया गया है कि वह व्यावहारिक रूप से अदृश्य है। प्रौद्योगिकी नैतिक रूप से तटस्थ होती है। वह अच्छी है या बुरी है, यह इस बात पर निर्भर करता है कि हम उसका किस तरह उपयोग करते हैं।
कनाडाई-अमेरिकी विज्ञान कथा लेखक