मैं विज्ञान-कथा (साइंस फिक्शन) लिखता हूं, जो विचारों का गल्प है। विचार मुझे उत्तेजित करते हैं और जैसे ही मैं उत्तेजित होता हूं, मैं उन विचारों से ही ऊर्जा प्राप्त करता हूं। किसी भी विचार को लेकर जब साइंस फिक्शन मस्तिष्क में पैदा होती है, जिसका अब तक कोई अस्तित्व नहीं था, तो जल्दी ही वह हर किसी के लिए सब कुछ बदल देती है। कुछ भी पहले की तरह नहीं रहता।
जैसे ही आपके मन में ऐसा कोई विचार आए, जो दुनिया के कुछ हिस्से को बदलने की क्षमता रखता है, तो समझ लीजिए कि आप साइंस फिक्शन लिख रहे हैं। यह हमेशा संभावनाओं की कला है, असंभावनाओं की नहीं। कल्पना कीजिए कि अगर अपने लेखन की शुरुआत में मेरे मन में एक ऐसी स्त्री की कहानी लिखने का विचार आता, जिसने एक गोली निगल कर कैथोलिक चर्च को नष्ट कर दिया, जिससे महिलाओं की मुक्ति का मार्ग प्रशस्त हुआ, तो लोग उस कहानी पर हंसते, लेकिन वह कहानी संभावनाओं के दायरे में होती और संभवतः महान साइंस फिक्शन होती।
जो काम मुख्यधारा का लेखन नहीं करता, वह साइंस फिक्शन करती है, क्योंकि मुख्यधारा के लेखक हमारी संस्कृति में पिछले पचास वर्षों के दौरान आए बदलावों पर ध्यान नहीं देते। हमारे समय के महत्वपूर्ण विचारों-चिकित्सा में विकास, हमारी प्रजाति के उन्नयन के लिए अंतरिक्ष खोज के महत्व- की मुख्यधारा के लेखन में उपेक्षा की गई। आलोचक अक्सर गलत होते हैं या समय से बीस साल पीछे होते हैं। विचारों के गल्प की उपेक्षा क्यों होनी चाहिए?
-मशहूर अमेरिकी विज्ञान-कथा लेखक