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सप्ताह की किताबें

Sun, 20 Nov 2016 12:53 AM IST
टीम डिजिटल/ अमर उजाला, नई दिल्ली
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1.समरथ (कविता संग्रह)
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कवि- विभा रानी
प्रकाशक- अवितोको बुक्स
मूल्य-300 रुपये

संवेदनाओं की खुराक
कैंसर! यानी जीते-जी मौत, लेकिन इस जानलेवा बीमारी को हंसते-हंसते गले लगाया थियेटर आर्टिस्ट, अनुवादक और कवियत्री विभा रानी ने। कैंसर होने पर एक व्यक्ति किन-किन परिस्थितियों, पीड़ा, भावनात्मक उतार-चढ़ाव से गुजरता है, उन जज्बातों को उन्होंने 'सेलिब्रेटिंग कैंसर' सीरीज के तहत अपने कविता संग्रह 'समरथ' में बखूबी प्रस्तुत किया है। सरल शब्दों में रची कविताओं के माध्यम से उन्होंने इस जानलेवा बीमारी से जुड़े तमाम उतार-चढ़ावों का जिक्र बेहद संवेदनशील तरीके से किया है। उनका यह काव्य संग्रह द्वैभाषिक है। इसमें हिंदी की कविताओं का अंग्रेजी अनुवाद भी मौजूद है। 180 पेज के इस कविता संग्रह में कई छोटी-छोटी कविताएं हैं, जो सरस हैं और कहीं भी बोझिल महसूस नहीं होने देती हैं।    


2.अच्छा इंसान, सफल विजेता कैसे बने
लेखक-शशिकांत सदैव  
प्रकाशक-डायमंड बुक्स
मूल्य-150 रुपये

सफलता जब सूत्रों में बंधती है
सफल इंसान कैसे बनें, यह एक ऐसा रोचक विषय है, जिस पर खूब लिखा जा चुका है और लिखा भी जा रहा है। लिखने वाले अपने अंदाज में सफलता की गारंटी देते हैं। ऐसा करोगे तो सफल हो जाओगे। ये नहीं किया था, इसलिए सफलता नहीं मिली आदि सफल बनाने की गारंटी देने वाली किताबें भी खूब मिल जाएंगी। इस कड़ी में शशिकांत सदैव लाए हैं अपनी किताब '' अच्छा इंसान, सफल विजेता कैसे बने''। 173 पन्नों की इस किताब में सफलता पाने और अच्छा इंसान बनने के लिए 18 अध्याय दिए गए हैं। इन्हें पढ़कर कोई खास और नई जानकारी नहीं मिलती है। हालांकि 'अच्छा इंसान सफल क्यों नहीं होता', 'सफल होना है तो काम निकलवाना सीखें', 'सफलता प्राप्ति में संगति का महत्व', जैसे अध्याय काफी उम्मीद बंधाते नजर आते हैं।
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3.रीबूटिंग इंडिया
लेखक- नंदन निलेकणी विरल शाह
प्रकाशक-राजपाल पब्लिकेशंस हाउस
मूल्य-495 रुपये

देश-दुनिया का ककहरा
इन्फोसिस टेक्नोलॉजी के सह-संस्थानपक नंदन निलेकणी और भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण में नीति और प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में काम करने वाले विरल शाह बेस्ट सेलर बुक 'रीबूटिंग इंडिया' का हिंदी अनुवाद लेकर आए हैं। 335 पृष्ठों की इस किताब में भारत के विकास और उससे जुड़े विषयों पर गंभीरता से चिंतन किया गया है। भारतीय जन-जीवन का हिस्सा बन चुके आधारकार्ड से जुड़ा विषय 'आधारःपर्दे के पीछे', 'ई-केवाईसी', 'सरकारी खर्चों को व्यवस्थित करना', 'राजनीति में एक नया युगः पार्टी एक मंच के रूप में', 'आगामी पीढ़ी का शिक्षण' जैसे कुल 16 गंभीर विषयों को शोध में शामिल किया गया है। भारतीय अर्थव्यवस्थाए और विकास से जुड़े विषयों पर यह पुस्तक गंभीर शोध प्रस्तुत करती है। इन विषयों को समझने के लिए यह अच्छी किताब है।
 
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