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'कला में लोगों के विवेक को प्रभावित करने की क्षमता है'

Wed, 12 Sep 2018 06:28 AM IST
मिखाइल शोलोखोव
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हम इस पृथ्वी पर रहते हैं, हम इसके कानूनों के अधीन हैं। दुनिया की आबादी का एक विशाल वर्ग समान इच्छाओं से प्रेरित है, उनके हित साझा हैं, जो उन्हें जोड़ते हैं। कामकाजी लोग ही अपने हाथों और दिमागों से सब कुछ बनाते हैं। मैं उन लेखकों में से हूं, जो यह मानते हैं कि कामकाजी लोगों की सेवा के लिए अपनी कलम का उपयोग करने की हमें स्वतंत्रता है। हम जिस युग में जी रहे हैं, वह अनिश्चितताओं से भरा हुआ है।

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कुछ ऐसी ताकतें हैं, जो पूरे राष्ट्र को युद्ध की भट्ठियों में झोंक देती हैं। ऐसे में एक लेखक या कलाकार का काम क्या है, जो खुद को ईश्वर के रूप में नहीं देखता है, बल्कि खुद को मानवता का एक छोटा सा अंश मानता है? उसका काम है अपने पाठकों के प्रति ईमानदार होना, लोगों को सच बताना, जो कभी-कभी अप्रिय हो सकता है, लेकिन हमेशा निडर होता है। उसका काम है, लोगों के हृदय को मजबूत बनाना, उसे अपना भविष्य निर्माण करने में सक्षम बनाना।

उसका काम है पूरी दुनिया में शांति का अग्रदूत बनना और अपने शब्दों से शांति प्रिय लोगों की नस्ल तैयार करना। इसके अलावा उसका काम लोगों को प्रगति के लिए एकजुट करना भी है। कला में लोगों के विवेक को प्रभावित करने की बड़ी क्षमता है। मेरा मानना है कि हर किसी को खुद को कलाकार कहने का हक है, अगर वह लोगों के मस्तिष्क को सुंदर बनाने में सक्षम बनाता है और अगर वह मानवता को लाभ पहुंचाता है। मैं चाहता हूं कि मेरी किताबें लोगों को बेहतर बनने में मदद करें, उनके मस्तिष्क को शुद्ध करें। मैं चाहता हूं कि मेरी किताबें लोगों में साथियों के प्रति प्यार और मानवता के आदर्शों के लिए लड़ने की इच्छा पैदा करें और मानवजाति का विकास करें।
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-नोबेलजयी रूसी उपन्यासकार

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