मेरा जन्म 1924 में जर्मनी में हुआ और मैं हमेशा से मानता हूं कि जिन लोगों ने प्रथम विश्वयुद्ध के बाद जन्म लिया, उन्हें बीसवीं सदी का भार उठाना पड़ा। हम एक ऐसी पीढ़ी के हैं, जिन्हें प्रथम विश्वयुद्ध के बाद का समय विरासत में मिला और जिसने दूसरा विश्वयुद्ध झेला। द्वितीय विश्वयुद्ध के बाद भी मैं काफी युवा था। मेरे पिता जर्मन यहूदी थे, वह बेहद रूढ़िवादी और दृढ़ आस्तिक थे।
मेरे पिता का परिवार खेतिहर था और मेरी मां का परिवार भी ऐसा ही था। मैंने पहली कक्षा में ही हीब्रू और जर्मनी, दोनों भाषाएं सीखीं। मेरी एक बड़ी बहन है, जो इस्राइल में रहती है। मेरे पिता कभी विश्वविद्यालय नहीं गए, लेकिन वह काफी किताबें पढ़ते थे और संगीत का आनंद लेते थे। मेरी मां को भी किताबें पढ़ने का चाव था।
इस तरह से मेरा घर सांस्कृतिक रूप से समृद्ध था। संगीत, कविता के स्वर मेरे घर में गूंजते रहते थे। मेरी मां और दादी मुझे जर्मन साहित्य पढ़ाती थीं। मेरी पहली शिक्षा बाइबिल की व्याख्या थी। लेकिन मैं जर्मन लोकगीतों और लोककथाओं के साथ भी बड़ा हुआ, जो बाइबिल की कहानियों के रूप में मेरी कल्पना का हिस्सा हो गए।
इतिहास की मेरी समझ इन्हीं कथाओं से आती है, जिन्हें आप परी-कथा जैसा इतिहास कहते हैं, वह मुझे बहुत प्रिय है। मेरा मानना है कि बच्चों के लिए धर्म की दुनिया बहुत अच्छी है, खासकर शिक्षित बच्चों के लिए, क्योंकि यह कल्पनाशीलता विकसित करने में मदद करती है। धर्म की दुनिया तार्किक नहीं है, इसलिए बच्चे इसे पसंद करते हैं, यह फंतासी की दुनिया है, बिल्कुल बच्चों की परी-कथाओं की तरह।
-इस्राइल के मशहूर कवि