उपन्यास लिखना शुरू करने से पहले मैं यह सोचता था कि यह सब बकवास है। फिर मैं अलग तरह से सोचने लगा। मैं हमेशा यह मानता था कि एक उपन्यासकार के पास मात्र एक किरदार होता है, जो वह स्वयं होता है। लेकिन बाद में मेरी यह धारणा भी खत्म हुई।
मैं यह भी मानता हूं कि अगर आपको अपने किरदारों के साथ लंबे समय तक रहना है, तो उसके प्रति प्रेमपूर्ण रहना ही होगा, हालाकि मैंने अपने किरदारों को मारा भी है। मेरा मानना है कि एक उपन्यासकार को हर तरह के लोगों से मिलना चाहिए और यात्राएं करनी चाहिए। अगर आप उपन्यास लिखना चाहते हैं, तो आपको उन लोगों से भी मिलना चाहिए, जिनसे सामान्य तौर पर आप नहीं मिलते हैं।
अक्सर ऐसा होता है कि उपन्यास स्वयं लेखक पर हावी होता है और लेखक बस चरित्रों के हिसाब से घटनाओं में तालमेल बिठाने वाला बनकर रह जाता है। कब कोई लेखक किसी रचना को लिखना शुरू करेगा, यह उसे भी मालूम नहीं होता है। ऐसा कहने वाला झूठ बोलता है। जब मैं और मेरी पत्नी इंडोनेशिया में थे, तो हम उस व्यक्ति से मिले, जो वियतनाम युद्ध के दौरान मैरीलैंड यूनिवर्सिटी में शिक्षक था।
मैंने उसकी बातें नोटबुक में दर्ज की, क्योंकि मुझे लगता था कि यह वियतनाम युद्ध को जानने का एक बेहतर तरीका है। इस तरह मेरी किताब द रेड व्हाइट ऐंड ब्लू का जन्म हुआ। उपन्यास लिखना एक कठिन मानसिक श्रम है, पर हर किताब लिखने के बाद एक ऐसा क्षण आता है, जब आप परम आनंद का एहसास करते हैं। इस खुशी का वर्णन करना बहुत मुश्किल है।
-मशहूर अमेरिकी उपन्यासकार