पंद्रह वर्ष की उम्र से ही मुझे कविता में दिलचस्पी थी। मेरी समस्या यह थी कि इस बात को लेकर कोई आम सहमति नहीं थी कि हम कविता लिखने के लिए स्वयं को कैसे प्रशिक्षित करें। एक अकेली पंक्ति से कोई अनुच्छेद नहीं बन सकता, लेकिन एक अकेली पंक्ति एक पूरी कविता बन सकती है।
मेरा मानना है कि अगर नियमित रूप से हम कविता के मूल सिद्धांतों-लय-ताल, कविता और प्रेम, युद्ध, मृत्यु जैसे विषयों पर नहीं लौटे, तो कविता की बेल सूख सकती है। मैं बहुत ज्यादा लिखने वाला कवि नहीं हूं। हमेशा मुझे यह लगता रहा कि श्रेय लेने के लिए कविता लिखना बुरी बात है। भले ही हर तीन या पांच साल पर एक कविता संग्रह प्रकाशित करना अच्छा लगे, लेकिन यह वास्तव में अच्छा नहीं होता।
यदि आप गीत लिख रहे हैं, तो आपको कुछ ऐसा लिखना होगा, जिसे क्रमिक रूप से समझा जा सके। यदि आप कागज पर लिखी कविता पढ़ते हैं, तो आप अपनी नजर ऊपर-नीचे कर सकते हैं, आप पूरी कविता को एकसाथ देख सकते हैं, लेकिन गीत सुनते हुए आप ऐसा नहीं कर सकते। गीत को आप क्रमिक ढंग से सुनना चाहते हैं।
कविता के भीतर ही उसका इतिहास मौजूद रहता है और यह मूल रूप से मौखिक होती है। बालगीत के रूप में ही हम कविता से परिचित होते हैं। कविता पर अकेले काम करना होता है, इसलिए कवि सभी कलाकारों से स्वतंत्र होता है। कविता लिखते हुए मैं बस यही चाहता हूं कि यह प्रकाशित हो, ताकि लोग इसे पढ़ सकें। जहां आवाज उठाई जाती है, कविता वहीं से शुरू होती है।
-ब्रिटेन के विख्यात कवि