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अंतर्ध्वनि: मैं विचार से नहीं, बल्कि छवि से लेखन की शुरुआत करता हूं

Wed, 04 Sep 2019 12:15 AM IST
देव कश्यप गाब्रियल गार्सिया मार्केज
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प्रतीकात्मक तस्वीर
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लिखना मैंने इत्तफाक से शुरू किया, संभवतः एक दोस्त के आगे यह सिद्ध करने के लिए कि मेरी पीढ़ी लेखक पैदा करने में सक्षम है। उसके बाद मैं मजे के लिए लिखने के जाल में फंसा और उसके बाद ही असल में मैं जान पाया कि दुनिया में लिखने से अधिक प्रिय मुझे कुछ नहीं था। शुरू में जब मैं अपना शिल्प सीख रहा था। मैं बहुत खुशी-खुशी, करीब-करीब गैर जिम्मेदारी के साथ लिखा करता था। एक दफे, एक ही सिटिंग में मैंने एक छोटी कहानी पूरी कर ली थी।

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लेकिन अब समय बीतने के साथ लेखन कार्य बहुत दर्द भरा हो गया है। एक ऐसे महाद्वीप में जो सफल लेखकों के लिए तैयार न हो, साहित्यिक सफलता में कोई दिलचस्पी न रखने वाले व्यक्ति के साथ सबसे खराब बात यह हो सकती है कि उसकी किताबें धड़ाधड़ बिकने लगें। मुझे सार्वजनिक तमाशा बनने से नफरत है। मुझे टेलीविजन, गोष्ठियों और गोलमेजों से नफरत है। मेरे विचार से दूसरे लेखकों के लिए एक किताब का जन्म किसी विचार या सिद्धांत से होता है।

मैं हमेशा एक इमेज (छवि) से शुरू करता हूं। 'वन हंड्रेड इयर्स ऑफ सालीट्यूड' में मैंने जिस विजुअल इमेज का इस्तेमाल किया है, वह है-एक बच्चे को सर्कस में बर्फ दिखाने ले जा रहा एक बूढा आदमी। इसकी प्रेरणा एक वास्तविक कारण से मिली थी। मुझे याद है, जब मैं आराकाटाका में एक नन्हा बच्चा था। मेरे दादाजी मुझे सर्कस में कूबड़ वाला ऊंट दिखने ले गए थे। एक दिन जब मैंने उनसे कहा कि मैंने सर्कस में बर्फ नहीं देखी, तो वह मुझे बनाना कंपनी के इलाके में ले गए।
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वहां उन्होंने कंपनी के लोगों से जमी हुई मुलेट मछलियों का एक क्रेट खुलवाया और मुझे अपना हाथ भीतर डालने को कहा। उपन्यास इस एक छवि से शुरू हुआ था। किताब के पहले वाक्य को मैं बहुत महत्व देता हूं, क्योंकि पहला वाक्य किताब की शैली, संरचना और उसका आकार जांचने की प्रयोगशाला हो सकता है।
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(नोबेलजयी स्पेनिश साहित्यकार)

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