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फेसबुक वॉल से: भारत की सबसे पुरानी लाइब्रेरियों में से एक बनारस की कारमाइकल लाइब्रेरी

Sun, 24 Dec 2017 03:50 PM IST
अभियान डेस्क/ अमर उजाला
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carmichael library varanasi
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बनारस में बांसफाटक स्थित कारमाइकल लाइब्रेरी उत्तर भारत की सबसे पुरानी लाइब्रेरियों में से एक है। इसकी स्थापना वर्ष 1872 में संकठा प्रसाद खत्री ने बनारस के तत्कालीन कमिश्नर सी.पी. कारमाइकल के नाम पर की थी। सी.पी. कारमाइकल तब के पश्चिमोत्तर प्रांत (नॉर्थ-वेस्टर्न प्रोविंसेज), जो आगे चलकर उत्तर प्रदेश बना, के बड़े पुलिस अधिकारी थे और वे पश्चिमोत्तर प्रांत में इंस्पेक्टर जनरल भी रहे।
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कारमाइकल की गहरी रुचि कला, साहित्य और भारतीय संस्कृति में थी। सी.पी.कारमाइकल ने इस लाइब्रेरी के संवर्धन और विकास में दिलचस्पी ली। उनके प्रयासों के चलते बनारस की म्युनिसिपलिटी ने 1875-6 में इस लाइब्रेरी को चौक क्षेत्र में भवन-निर्माण के लिए 1000 रुपये की रकम दी। बैठकें होती थीं। राजा शिव प्रसाद सितार-ए-हिंद इस लाइब्रेरी के पहले अध्यक्ष रहे। राष्ट्रीय आंदोलन के दौरान यह लाइब्रेरी भी राष्ट्रीय आंदोलन की गतिविधियों और उसमें शामिल लोगों की गवाह का केंद्र बनी।

शुभनीत कौशिक की फेसबुक वॉल से
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व्हाट्सएप कथा: दूसरों की सेवा की भावना

एक लड़का सुबह-सुबह दौड़ने जाया करता था। वह रोज एक बूढ़ी महिला को देखता। वह बूढ़ी महिला तालाब के किनारे छोटे कछुओं की पीठ को साफ किया करती थी। उसने इसके पीछे का कारण जानने की सोची। लड़का महिला के पास गया और उससे बोला, 'नमस्ते! मैं आपको हमेशा इन कछुओं की पीठ को साफ करते हुए देखता हूं।

आप ऐसा क्यों करती हैं?' महिला ने उस लड़के को देखा और जवाब दिया, 'मैं हर दिन यहां आती हूं और इन कछुओं की पीठ साफ करते हुए सुख-शांति का अनुभव करती हूं क्योंकि इनकी पीठ पर जो कवच होता है, उस पर कचड़ा जमा हो जाने की वजह से इनकी गर्मी पैदा करने की क्षमता कम हो जाती है।

इसलिए ये कछुए तैरने में मुश्किल का सामना करते हैं। कुछ समय तक अगर ऐसा ही रहे तो ये कवच भी कमजोर हो जाते हैं, इसलिए इसके कवच को साफ करती हूं।' यह सुनकर लड़के के अंदर दूसरों की सेवा करने की भावना आ गई थी।

चंडीगढ़ से रश्मि आहूजा
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