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सपने देखना बंद कर देने के कारण लोग बूढ़े होते हैं

Mon, 29 Jan 2018 02:56 PM IST
गैब्रियल गार्सिया मार्खेज, उपन्यासकार एवं पत्रकार
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मैं हमेशा इस बात को लेकर आश्वस्त रहा हूं कि मेरा असली पेशा पत्रकार का रहा है। लेकिन पत्रकारिता की कामकाजी परिस्थितियां मुझे कभी पसंद नही आईं। इसके अलावा मुझे अखबार के हितों के लिए अपने विचारों से समझौता करना पड़ा। अब चूंकि मैं एक उपन्यासकार के रूप में आर्थिक रूप से स्वतंत्र हो चुका हूं, मैं उन विषयों को चुन सकता हूं, जिनमें रुचि है और जो मेरे विचारों के अनुरूप है। फिर भी मैं हमेशा पत्रकारिता का एक बड़ा काम करने का आनंद उठाता हूं।

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पत्रकारिता में एक गलत तथ्य आपके पूरे काम को नुकसान पहुंचा सकता है, जबकि उपन्यास या कथा-साहित्य में एक सही तथ्य आपके पूरे काम को वैधता प्रदान करता है। पत्रकारिता और साहित्य में यही मूल अंतर है और यह लेखक की प्रतिबद्धता पर निर्भर करता है। एक उपन्यासकार तब तक जो चाहे लिख सकता है, जब तक कि वह लोगों का विश्वास अपने ऊपर बनाए रखता है। किसी भी चीज को शानदार, विश्वसनीय और प्रशंसनीय बनाने की कला मैंने पत्रकारिता से सीखी है।

इसमें सबसे महत्वपूर्ण होता है अपनी बात को स्पष्ट रूप से कहना। लोग जीवन भर यह सोचते रहते हैं कि वास्तव में वे कैसे जीना चाहते हैं। मैंने अपने दोस्तों से भी पूछा, पर किसी के पास स्पष्ट उत्तर नहीं था। मगर मैं उन दिनों की तरह जीना चाहता हूं, जब मैंने लव इन द टाइम ऑफ कॉलेरा लिखा था। यह सही नहीं है कि लोग बूढ़े होने के कारण सपने देखना छोड़ देते हैं, बल्कि सच यह है कि सपने देखना बंद कर देने के कारण लोग बूढ़े होते हैं।

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