असली साहस क्या है, यह मैं जानता हूं और सच्ची करुणा को भी। मुझे लगता है कि लेखक अपने विवेक के लिए, अपनी आत्मा के लिए और अपने सच्चे पाठकों के लिए लिखता है। लेखक को अपने विचारों को गहरे में दफन कर देना चाहिए और उन्हें अपने उपन्यासों के पात्रों के माध्यम से व्यक्त करना चाहिए।
एक लेखक को समाज के स्याह पक्ष और मानव स्वभाव की कुरूपता पर आलोचना और गुस्सा व्यक्त करना चाहिए, लेकिन हमें एक समान अभिव्यक्ति का उपयोग नहीं करना चाहिए। जब साहित्य मौजूद रहता है, तो हम संभवतः यह ध्यान नहीं देते कि यह कितना महत्वपूर्ण है, लेकिन जब यह नहीं होता है, तो हमारी जिंदगी क्रूर बन जाती है। इसलिए मुझे अपने पेशे पर गर्व है और मैं इसकी महत्ता को समझता हूं।
चूंकि मैंने कठिन परिस्थितियों में अपना जीवन बिताया है, इसलिए मुझे लगता है कि मुझे जीवन की गहरी समझ है। मैं यह जानता हूं कि राजनीतिक विवादों और आर्थिक संकट पर साहित्य का मामूली असर पड़ता है, लेकिन मनुष्य के लिए इसका महत्व प्राचीन है। मैंने जो राह अपनाई, उस पर लगातार चल रहा हूं और मेरे पांव जमीन पर टिके हुए हैं, मैं अपने साहित्य में सामान्य लोगों के जीवन, उनकी भावनाओं को व्यक्त करता हूं। जहां जीवन है, वहां मौत अपरिहार्य है। मरना आसान है, जीना बहुत कठिन। जीवन जितना कठिन होता है, जीने की इच्छा उतनी मजबूत होती है। और जितना बड़ा मृत्यु का भय होता है, उससे बड़ा जीवन जीने का संघर्ष होता है। इस आध्यात्मिक पीड़ा को व्यक्त करना लेखक का पवित्र कर्तव्य है।
-नोबेलजयी चीनी उपन्यासकार