अपने जीवन की जिम्मेदारी स्वीकार करने की इच्छा से ही आत्मसम्मान का जन्म होता है। मैंने हमेशा पाया है कि अगर मैं किसी चीज की पड़ताल करती हूं, तो वह कम डरावनी होती है। मैं पश्चिम में पली-बढ़ी हूं, जहां हमेशा से यह सिद्धांत रहा है कि अगर आपने सांप को देखा है, तो इसका मतलब यह नहीं कि वह आपको काटने जा रहा है। और यही वह तरीका है, जिससे मैं दर्द का मुकाबला करती हूं।
जब मैं ग्यारह या बारह वर्ष की थी, तभी मैंने हेमिंग्वे को पढ़ा था। उनके साहित्य में मेरे लिए चुंबकीय आकर्षण था, क्योंकि उनके वाक्य बेहद सरल थे, या यों कहें कि सरल दिखाई पड़ते थे। अगर मेरी योग्यता व्यवस्थित रहती, तो शायद मैं कभी लेखक नहीं बनती। अगर मुझे खुद अपने दिमाग तक पहुंच का सीमित अवसर भी मिला होता, तो मेरे लेखक बनने का कोई कारण नहीं था।
मैं यही जानने के लिए लिखती हूं कि मैं क्या सोचती हूं, क्या देखती हूं और उसका मतलब क्या है; मैं क्या चाहती हूं और मेरा डर क्या है। उपन्यास लिखना मेरे लिए एक पूर्णकालिक काम है। यह सूचना लिखने से पूरी तरह अलग है। अक्सर आप किसी को अपने अच्छे या बुरे सपने के बारे में बताना चाहते हैं, लेकिन कोई भी व्यक्ति दूसरे के सपने के बारे में सुनना नहीं चाहता। लेकिन लेखक हमेशा पाठकों को इस तरह मोहित करता है कि वे सपने सुनने के लिए तैयार हो जाते हैं। किसी भी तरह का लेखन मेरे लिए हमेशा प्रदर्शन की वस्तु है। मैं हमेशा समुद्र की विशालता और उसकी गहराई से अभिभूत रही हूं। समुद्र के अनदेखे तल हमेशा मुझे आकर्षित करते हैं।