मेरी मां ऐसी महिला थी, जो निराश रहती थीं। लेकिन उनके पास बहुत क्षमता थी और उनकी सारी ऊर्जा मुझमें और मेरे भाई में चली आई। मैं बचपन से ही लिखने लगी थी। जब मैं सत्तरह वर्ष की थी, तभी मैंने दो उपन्यास लिखे थे, जो बहुत ही खराब थे। इसलिए उन्हें फेंकने पर मुझे कोई दुख नहीं हुआ।
किसी भी इंसान को अगर मौका दिया जाए, तो वह कहीं भी सैकड़ों अप्रत्याशित प्रतिभाओं और क्षमताओं के रूप में खिल सकता है। कहानियां और कहानी कहने की विरासत हमारे लिए सबसे ज्यादा मूल्यवान है। सारा ज्ञान हमारी कहानियों और गीतों में है। हम अपने अनुभवों की जिस तरह से रचना करते हैं, वही कहानी है। हमारी कहानियों का एक ढांचा होता है-शुरुआत, मध्य और अंत, जो हमारे दिमाग में रहता है।
एक लेखक एक विचार से प्यार करता है, और उसे बहुत दूर तक ले जाता है। कहानी लिखते हुए मैं आशावाद या निराशावाद के बारे में नहीं सोचती, बस कहानी लिखती हूं। मेरा मानना है कि एक लेखक को खुद को खुश करने के लिए सबसे पहले लिखना चाहिए। उसे और किसी भी चीज की परवाह नहीं करनी चाहिए। लेखन का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा जीवन जीना होता है। आपको इस तरह से जीना होगा कि उसी से लेखन उभरे।
मुझे कहानी लिखना बेहद मजेदार लगता है। मानव जाति शुरू से ही कहानी कहने की कला जानती है। लेखन प्रक्रिया में कहानी जितनी देर तक दिमाग में पकती है, उतनी ही अच्छी होती है। पहले सामान्य लोग भी लिखने-पढ़ने का सम्मान करते थे। वे किताबों को आदर देते थे, लेकिन अब किताबों का सम्मान घटा है।
-नोबेलजयी ब्रिटिश लेखिका