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'सामाजिक यथार्थ के ज्ञान ने मुझे सजग लेखिका बनाया'

Tue, 10 Jul 2018 03:22 PM IST
अरूपा कलिता पटंगिया
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अरूपा कलिता पटंगिया
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मेरा जन्म गोलाघाट में हुआ। मेरी प्रारंभिक पढ़ाई वहीं हुई, बाद में मैंने गुवाहाटी विश्वविद्यालय से अंग्रेजी में परास्नातक और फिर पीएच.डी की। बचपन में मुझे गोलाघाट का प्राकृतिक सौंदर्य बेहद आकर्षित करता था। लेकिन जैसे-जैसे मैं बड़ी होती गई, वैसे-वैसे अपने आसपास की स्थिति पर गंभीरता से नजर दौड़ाने लगी। उसी दौरान मुझे यह महसूस हुआ कि हमारे समाज में लड़कियों के लिए सिर उठाकर चलना और अपनी मर्जी का जीवन चुनना बेहद कठिन है। परिवार के संस्कार के कारण साहित्य में मेरी रुचि थी। मेरे पिता खुद असमिया साहित्य के गंभीर पाठक थे। लेकिन मुझे कविताओं के बजाय कहानियां और उपन्यास ज्यादा आकर्षित करते थे, क्योंकि उनमें जीवन का यथार्थ होता था।

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पर्ल एस बक के महिला पात्रों पर शोध करने के दौरान ही मैंने यह तय कर लिया था कि अगर मैं लेखन के क्षेत्र में जाऊंगी, तो समाज में महिलाओं की स्थिति पर ही खुद को ज्यादा केंद्रित करूंगी। हालांकि मेरे लेखन में असम का भूगोल और इसकी संस्कृति अटूट रूप से मौजूद है। पर असमिया स्त्रियों की स्थिति मेरे लिए सबसे अधिक महत्व रखती है। मेरे लिए लेखन शौक या कोई खेल नहीं है। बल्कि अपनी कलम का इस्तेमाल मैं समाज के विभिन्न वर्गों को चित्रित करने के लिए करती हूं।

चूंकि मैं एक औरत हूं, इसलिए अपने समाज की औरतों के बारे में लिखती हूं। मुझे हमेशा ऐसा लगता है कि इस भेदभाव भरे समाज में औरतों के बारे में कहने के लिए मेरे पास बहुत
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कुछ है। मैंने असमिया फीचर फिल्म कथानदी के संवाद भी लिखे हैं। लेकिन यथार्थपरक उपन्यास लिखना मुझे सबसे अच्छा लगता है।
-चर्चित असमिया लेखिका।

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