कम उम्र से ही मुझे बहुत भावपूर्ण ढंग से किताबें पढ़ने की आदत थी, लेकिन यह मेरे लिए एक निरंतर संघर्ष था। मेरी मां तो कमोबेश मुझे पढ़ने भी देती थी, लेकिन मेरे पिता जैसे ही मुझे पढ़ते हुए देखते, तो कहते, जाओ, बाहर जाकर एक सामान्य बच्ची की तरह खेलो। इसलिए मैं पढ़ने के लिए एकांत कोना तलाशती रहती थी, ताकि मेरे पिता मुझे खोज न सकें।
हमारे परिवार में कोई ऐसा नहीं था, जो आनंद के लिए किताबें पढ़ता हो। लेकिन जब मैं छोटी थी, तो मेरी मां मुझे सुनाने के लिए किताबें पढ़ती थीं। इस तरह मैंने किताबें पढ़ना अपनी मां से सीखा। मां ने ही मुझे किताबों से प्रेम करना सिखाया।
मैं किसी ऐसे लेखक को नहीं जानती, जिसे इस दुनिया में असहज महसूस न हुआ हो। हम सभी किसी न किसी अर्थ में स्वयं को निर्वासित समझते हैं। यही कारण है कि हम लिखते हैं। हमें लगता है कि हम इस दुनिया में फिट नहीं हैं, कि यह दुनिया हमारे लायक नहीं है। अगर आपको यह दुनिया अपने घर जैसी लगेगी, तो आप कभी उपन्यास नहीं लिख सकते।
मैं इसका वर्णन नहीं कर सकती कि लिखना मुझे कितना प्रिय है। अगर लोग यह जान जाएं कि लेखन कितनी खुशी देता है, तो लोग हमेशा लिखते ही रहेंगे। यह दुनिया का सबसे बड़ा रहस्य है। लेखन रहस्यमय होता है, ऐसा माना जाता है, लेकिन किसी भी तरह से अगर आप लिखने लगते हैं, तो अंततः यह खुशी देता है। हम दुनिया की प्रतिक्रिया में लिखते हैं, हम जो पढ़ते और सीखते हैं, उसकी प्रतिक्रिया में लिखते हैं और अंत में हम अपनी आंतरिक भावना, अपने जीवन के लिए लिखते हैं।
-मशहूर अमेरिकी उपन्यासकार