यह बिल्कुल सच है कि जब मैं छोटी थी, तो लेखन मुझे इतना महत्वपूर्ण लग रहा था कि मैं इसके लिए कुछ भी बलिदान करने को तैयार थी। क्योंकि मैं अपने सृजन की दुनिया के बारे में सोचती थी कि वह हमारी इस वास्तविक दुनिया की तुलना में कहीं ज्यादा जीवंत है। लेखन का कार्य बेहद कठिन होता है, लेकिन जितना ज्यादा आप लिखते हैं और उसमें जितना ज्यादा आनंद लेते हैं, वह उतना ही बेहतर होता है।
आम तौर पर कहानी लिखने से पहले मुझे कहानी की पूरी जानकारी होती है। जब मैं नियमित रूप से लिखती हूं, तो कहानियां मेरे जेहन में कौंधती रहती हैं। मैं चाहती हूं कि मेरी कहानियां लोगों को आनंद के उच्च स्तर पर ले जाए। मैं चाहती हूं कि मेरी कहानियां जीवन के बारे में बताएं। यह जरूरी नहीं कि कहानियों का अंत सुखद ही हो, लेकिन अगर पाठक कहानी खत्म करे, तो वह स्वयं को कुछ अलग महसूस करे।
मैं स्वयं कहानी को हमेशा शुरू से अंत तक नहीं पढ़ती हूं। मैं कहीं से भी पढ़ना शुरू कर देती हूं। कहानी सड़क की तरह नहीं होती, बल्कि घर की तरह होती है, जिसके भीतर आप जाते हैं और थोड़ी देर के लिए वहां ठहरते हैं। अपने घर में भी मैं अक्सर छिपने की जगह ढूंढती हूं, कभी-कभी बच्चों से, तो अक्सर बाकी कामों से।
मैं इसलिए छिपना चाहती हूं, ताकि अपना असली काम (लेखन) कर सकूं, जो अपने आंतरिक हिस्से को खुश करना है। मेरी मां अक्सर कहती थी, नफरत हमेशा पाप होती है। आपकी आत्मा में घृणा का एक भी बूंद होगी, तो वह आपकी छवि बदरंग कर देगी, जैसे काली स्याही दूध को कर देती है।
-नोबेलजयी कनाडाई लेखिका