हम चाहे कुछ भी हों, मनुष्य होने के नाते हमारा कर्तव्य है कि हम मानव जीवन के संरक्षक बने। समस्याओं के बारे में बात करने से कोई फायदा नहीं है, अगर आप समाधान की बात नहीं करते। मैं अपने कार्यों से यह दिखाने की कोशिश करती हूं कि अगर आप पर्याप्त परवाह करें, तो आप बेहतर दुनिया बना सकते हैं।
यह कोई बड़ी बात नहीं है। दयालुता का एक काम इसे कर सकता है। जैसा कि हम अपने लिए चाहते हैं, उसी तरह हम अपने बच्चों के लिए भी चाहते हैं कि वे शांति और आनंद का जीवन जिएं। अहिंसा ताकतवर लोगों का हथियार है। लेकिन अहिंसा ऐसी चीज नहीं है, जो आसानी से आती है, बल्कि आपको कैसे अहिंसक बनें, यह सीखना होगा।
हम बाधाओं को दूर करने में विश्वास करते हैं, लेकिन हम एक-दूसरे की भाषा सीखने, एक-दूसरे के भय और विश्वासों को समझने, शारीरिक, दार्शनिक और आध्यात्मिक रूप से एक-दूसरे को जानने के लिए लोगों के बीच सबसे उत्साहपूर्ण समाधान पर भी विश्वास करते हैं।
हमारे बीच की बाधाओं और दीवारों को बस एक ही ताकत गिरा सकती है, वह है प्रेम की शक्ति, सच्चाई की शक्ति और आत्मा की शक्ति। हमें एक ऐसी दुनिया बनानी होगी, जिसमें किसी भी मिसाइल के दूसरे छोर पर अज्ञात, शत्रुतापूर्ण अजनबी नहीं हों। प्यार को आगे बढ़ाने के लिए बुद्धि से ज्यादा जरूरी करुणा है। ईश्वर ने युद्ध शुरू नहीं किया, यह हम मनुष्यों ने शुरू किया है। पर हम भगवान के नाम पर लोगों को मारने की इजाजत देते हैं। मैं शांतिपूर्ण समाज की रचना करना चाहती हूं।
-नोबेलजयी शांति कार्यकर्ता