शुरू से ही दो चीजें मेरे जीवन में शामिल थीं-संगीत और किस्सागोई। इन दोनों चीजों के लिए मेरे पिता ने मुझे प्रेरित किया। वह एक पियानोवाद, अच्छे किस्सागो और उत्सुक पाठक थे।पंद्रह वर्ष की उम्र तक आते-आते पियानोवादक या संगीतकार बनने का विचार मैंने त्याग दिया।
जब मैं विश्वविद्यालय गया, तो मुझे यह पता था कि मेरा जीवन कागज काले करने में बीतने वाला है। मूल रूप से मैंने सोचा कि मैं उपन्यास और कविताएं लिखूंगा। फिर चौबीस-पच्चीस वर्ष की उम्र में थियेटर के प्रति मेरा झुकाव हुआ। यह निश्चित रूप से मेरी पत्नी शैला से मुलाकात की वजह से था, जो उस समय अभिनेत्री थी। लेकिन बाद में दो वजहों से मैं लेखन की तरफ मुड़ा। मेरे एक भी ऐसा नाटक नहीं है, जो बाहरी और आंतरिक घटनाओं के बीच जुड़ाव का प्रतिनिधित्व नहीं करता।
मैं जीवन से बाहर जो कुछ भी देखता, पढ़ता या सुनता था, उससे प्रभावित होता था। मैं उन्हें उनकी नाटकीय क्षमता के हिसाब से देखता था।इन बाहरी घटनाओं ने मुझे आंतरिक भावनाओं से निपटने का अवसर प्रदान किया। उदाहरण के लिए द ब्लड नोट के लेखन को देखा जा सकता है। उसकी उत्पत्ति मुझे आज भी याद है। इसका प्राथमिक क्षण वह था, जब एक रोज मैं देर रात घर लौटा और अपने भाई के कमरे में गया, जहां वह सो रहा था।
मैंने नींद में उसके शरीर और चेहरे को देखा, जिस पर दर्द झलक रहा था। उसका जीवन बहुत मुश्किल भरा था और यह उसके चेहरे पर लिखा था। यह मेरे लिए चौंकाने वाला क्षण था। मैंने उसके चेहरे पर जो दर्द देखा, वह द ब्लड नॉट में प्रमुख छवि है।
-दक्षिण अफ्रीकी नाटककार और उपन्यासकार