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यस बैंक संकटः कितना पड़ेगा निवेशकों पर असर और कहां हैं दिक्कतें?

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क्या संकट से उबर पाएगा यस बैंक - फोटो : Social Media
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आखिरकार, वह दिन आ गया जब लगातार परामर्श और समीक्षा के बाद भारतीय रिजर्व बैंक ( RBI ) ने यस बैंक पर मौद्रिक सीमा लगा दी। यह पहली बार है जब आरबीआई ने इतने बड़े बैंक पर मौद्रिक सीमा लगाई है। यस बैंक देश का पांचवा सबसे बड़ा निजी बैंक है। पांच मार्च 2020 को आरबीआई ने खाताधारकों के लिए पैसों की निकासी की सीमा 50,000 रुपये पर तय कर दी। निकासी की यह सीमा 3 अप्रैल, 2020 तक लागू रहेगी। साथ ही केंद्रीय बैंक ने यस बैंक के निदेशक मंडल के अधिकारों पर भी रोक लगाई है।

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राहत की उम्मीद और इंतजार 
अटकलों के बीच आरबीआई और सरकार ने भारतीय स्टेट बैंक ( SBI ) को संकट से जूझ रहे यस बैंक को खरीदने की दिशा में आगे बढ़ने के लिए मंजूरी दे दी है। एसबीआई ने स्टॉक एक्सचेंज को सूचित किया कि उसने बैंक में निवेश के लिए इन-प्रिंसिपल अप्रूवल यानी सैद्धांतिक मंजूरी दे दी है।

भारतीय स्टेट बैंक की अगुवाई वाले कंसोर्टियम को सरकार से मंजूरी मिली है। एलआईसी भी निवेश के अवसर तलाशेगी। इसके अलावा केंद्रीय बैंक ने एसबीआई के पूर्व उप प्रबंध निदेशक और सीएफओ प्रशांत कुमार की प्रशासक के रूप में नियुक्ति भी कर दी है। वे यस बैंक की बुक्स की जांच करेंगे, ताकि बैंक की वित्तीय स्थिति की स्पष्ट तस्वीर सामने आए। इस प्रक्रिया के बाद ही आरबीआई को इस संकट की गहराई पर स्पष्टता मिलेगी।
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आखिर कहां हुई गलती ?
शासन के मुद्दे और संपत्ति की गुणवत्ता के खुलासे पर दिक्कतें सामने आईं। आरबीआई ने यस बैंक द्वारा जारी एनपीए के आंकड़े और केंद्रीय बैंक द्वारा अपनाए गए नियमों के अनुसार एनपीए के आंकड़े में अंतर पाया।

इन चिंताओं के बीच साल 2018 में आरबीआई ने यस बैंक के संस्थापक राणा कपूर को पद छोड़ने के लिए कह दिया था। एक रणनीतिक निवेशक को खोजने के असफल प्रयासों के बाद बैंक की वित्तीय प्रणाली को नुकसान ना पहुंचाने के लिए आरबीआई ने मौद्रिक सीमा लगा दी।

केंद्रीय बैंक और सरकार जमाकर्ताओं की सुविधाओं को ध्यान में रखते हुए मामले का समाधान तेजी से निकाल रहे हैं। हमेशा की तरह निवेशकों को नुकसान उठाना पड़ सकता है। अगर एतिहासिक रूप से देखा जाए, तो बैंकों पर लगी मौद्रिक सीमा के लगभग हर मामले में निवेशकों को ही नुकसान उठाना पड़ा है। इस मामले में दोनों इक्विटी और म्यूचुअल फंड निवेशकों को नुकसान हो सकता है, जिन्होंने कर्ज योजनाओं में निवेश किया है।
 

डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यह लेखक के निजी विचार हैं। आलेख में शामिल सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है। अपने विचार हमें blog@auw.co.in पर भेज सकते हैं। लेख के साथ संक्षिप्त परिचय और फोटो भी संलग्न करें।

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