आज कल कोरोना के बढ़ते प्रकोप और चर्चाओं के चलते बाकी बीमारियों और स्वास्थ समस्याओं को तो जैसे हम भूल ही गए हैं। आजकल चर्चा सिर्फ और सिर्फ कोरोना और उससे होने वाली मौतों को लेकर है। इन्ही सब के बीच पिछले दिनों आई राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (एनसीआरबी) की रिपोर्ट पर शायद हम सबका ध्यान ही नहीं गया। यह रिपोर्ट भारत में हर साल आत्महत्या से होने वाली मौतों को लेकर थी।
इस रिपोर्ट के अनुसार, देशभर में 2019 में कुल 1,39,123 लोगों ने आत्महत्या की और इसका रोज का औसत निकालें तो हर रोज करीब 381 लोगों ने आत्महत्या कर अपनी जिंदगी खत्म कर ली। यह एक भयावह संख्या है और यह दर्शाता है कि आज की आधुनिक जीवनशैली में कहीं न कहीं लोग बहुत जल्दी ही हौसला हार रहे हैं और मौत को गले लगा रहे हैं।
वैसे देखा जाए तो आत्महत्या की मुख्य वजह गरीबी ही है। कुछ समय पहले आई डब्ल्यूएचओ की स्टडी के अनुसार, आत्महत्या उन देशों में ज्यादा होती हैं जहां प्रति व्यक्ति आय कम है, क्यूंकि गरीबी से जूझते कई लोग अपने सपनों को साकार करते-करते जिंदगी की लड़ाई हार जाते हैं। लेकिन आज के समय में अब इसका दूसरा पहलु भी है।
अब आत्महत्या सिर्फ गरीबों को नहीं बल्कि सम्पन्न लोगों को भी मार रही है। जहां गरीब मजबूरी में अपनी जिंदगी खत्म कर रहा है तो जिन लोगों के पास सुख सुविधाएं हैं, वो मानसिक अवसाद के शिकार हो कर मौत को गले लगा रहे हैं। चाहे वो बड़े बड़े बिजनेसमैन हो या फिल्म स्टार।
आखिर ऐसा क्यों है कि आत्महत्या की प्रवृति बढ़ती जा रही है? क्या जिंदगी अब पहले से मुश्किल होती जा रही है या अब आधुनिकता का बोझ या चकाचौंध से भरी जिंदगी हमें अंदर से खोखला करती जा रही है। आत्महत्या का सीधा संबंध हमारे मानसिक स्वास्थ्य से होता है।
हां, लेकिन इस मानसिक स्वास्थ्य पर असर कई तरीकों से पड़ता है। कहीं किसी को लोन की परेशानी है तो किसी को पारिवारिक, कहीं कोई प्रेम में फेल हो कर जिंदगी की लड़ाई हार रहा है तो कोई एग्जाम में फेल हो कर।
एनसीआरबी के रिपोर्ट में भी आत्महत्या के ऐसे ही कारणों का जिक्र है और पारिवारिक समस्याएं, बीमारी से परेशानी, बेरोजगारी, प्रेम और एग्जाम में नाकामी ही आत्महत्या के मुख्य कारण हैं। लेकिन यह समस्याएं तो सालों साल से हैं, तो और हम ही नहीं हमारे माता पिता भी इन सबसे लड़ कर मजबूत बन कर जिंदगी में आगे आए हैं। इसका मतलब यह है कि आत्महत्या की वजह यह समस्याएं नहीं बल्कि इनको लेकर हमारा नजरिया है।