आइए करें प्रयास ताकि फिर से चहक उठे अंगना
- मकानो में कुछ खुली जगहों पर गड्ढेनुमा आकृतियां बनाएं
- घर के बाहर लकड़ी के छोटे-छोटे बक्से बनाएं, जिनमें गौरैया घोसला बना सकें
- घर के बचे खाद्य पदार्थों, भोजन को फेंकने की जगह खुली जगह पर बिखरा दें
- लॉन, बड़े गमले या बगीचे में देसी पेड़-पौधे लगायें
- कटोरे, आधे घड़े या ऐसे ही किसी पात्र में पानीं रखें
- कृत्रिम घोसला बनायें व पात्र में खाद्य पदार्थ रखें
- घर की छत, टेरेस पर भी अनाज के दाने बिखेरें
- अंधाधुंध कीटनाशक का प्रयोग न करें
महादेवी वर्मा ने अपनी कहानी गौरैया में कामना भी की है कि हमारी शहरी जीवन को समृद्ध करने गौरैया वापस हमारे घर-आंगन लौटेगी। तो आइए कुछ प्रयास हम भी करें, ताकि फिर से हमारे घर-आंगन में हमारी प्यारी चिड़ैया मेहमान बन कर लौटे और परिवार बन कर बस जाए।
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