जैविक दूध सेहत के लिए काफी फायदेमंद है।
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जैविक दूध सेहत के लिए काफी फायदेमंद है। शोध से पता चला है कि जैविक चारा खाने वाली गायों के दूध पीने से शरीर में पॉलीअनसैचुरेटेड वसा में इजाफा होता है। जैविक दूध में बढ़िया कोलेस्ट्रोल की
मात्रा सामान्य दूध से दोगुनी ज्यादा होती है।
एक रिपोर्ट के अनुसार देशी गाय के दूध में ओमेगा थ्री मौजूद होता है। जिससे हार्ट, डाइबिटीज, कैंसर जैसी बीमारियांं दूर होती हैंं। बच्चों के दिमाग के विकास के लिए भी देसी गाय का दूध लाभदायक मानाा जाता है।
देसी गायों पर इन दिनों खूब प्रयोग हो रहा है। इस मामले में बिरसा कृषि विश्वविद्यालय, रांची के वेटनरी संकाय द्वारा संचालित पशु प्रसार शिक्षा विभाग के गव्य प्रक्षेत्र ईकाई के प्रभारी, डॉ. आलोक कुमार पांडेय बताते हैं कि देसी गाय की पीठ पर मोटा सा हम्प होता है। जिसमें सूर्यकेतु नाड़ी होती है, जो सूर्य के किरणों के संपर्क में आते ही दूध में स्वर्ण का प्रभाव छोड़ती है। इससे देसी गाय के दूध में स्वर्ण तत्व की मात्रा बढ़ जाती है। देसी गाय के दूध पीने से कैंसर रोग का खतरा नहीं के बराबर होता है।
आंकड़े बताते हैं कि केवल झारखंड राज्य में 38 लाख ब्रीडेबल गो वंशीय पशु हैं, जिसमें लगभग 35 लाख देशी किस्म की हैं जिनका दूध प्राकृतिक रूप से मनुष्यों के लिए बहुुत फायदेमंद है। पूरे देश की यदि बात करें तो यह संख्या करोड़ों में होगी।
इन पशुओं को केवल चराकर या पुआल कुट्टी एवं जंगलो से प्राप्त घास खिला कर रखा जाता है। पशुओं के बीमार होने की स्थिति में इन्हें देसी चिकित्सा प्रणाली यानि औषधीय पौधों से इलाज किया जाता है। ज्यादा समय तक ठीक नहीं होने या जटिल बीमारियों के लिए पशु चिकित्सक के पास ले जाया जाता है।
डॉ. पांडेय ने बताया कि देसी गाय की दूध उत्पादन क्षमता बहुुत कम होती है और राज्य में हरे चारे की लगभग 55 प्रतिशत कमी है। पशुओं को उत्तम गुणवत्ता वाले चारे को खिलने से पशुओं की उत्पादकता में काफी सुधार आता है।
अत: राज्य में जैविक हरे चारे के व्यापक पैमाने पर उत्पादन की आवश्यकता है। देशी नस्ल के पशुओं के नस्ल सुधार हेतु विदेशी पशुओं (होल्स्टीन फ्रीजियन एवं जर्सी) के स्थान पर रेड सिन्धी, गीर, साहीवाल, थारपारकर के सांढो के वीर्य का इस्तेमाल किया जाए तो ज्यादा उपयोगी साबित होगा। इसके अलावा पशुओं के चिकित्सा हेतु आयुर्वेदिक चिकित्सा प्रणाली को बढ़ावा देने की आवश्यकता है।
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