दुनिया में हर वर्ष 31 मई को विश्व तंबाकू निषेध दिवस मनाया जाता। विश्व स्वास्थ्य संगठन ने 1988 में 31 मई को हर साल दुनिया भर में विश्व तंबाकू निषेध दिवस के रूप में मनाने का निर्णय लिया था। उसके बाद हर वर्ष यह दिवस मनाया जा रहा है।
तंबाकू एक ऐसी वस्तु है जिससे दुनिया का हर व्यक्ति परिचित है। चाहे कोई तंबाकू का सेवन करता हो या ना करता हूं मगर उसके दुष्परिणामों का हर व्यक्ति को ज्ञान है। आज तंबाकू दुनिया के सामने सबसे बड़ी महामारी बनी हुई है। दुनिया में सबसे अधिक मौत का कारण भी तंबाकू है। उसके उपरांत भी सबसे अधिक व्यक्ति तंबाकू का सेवन करते हैं।
तंबाकू का दुनिया के हर देश में सेवन किया जाता है। विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार दुनिया भर में हर साल 70 लाख से अधिक मौतों का कारण तंबाकू बनती है। भारत में भी तंबाकू का प्रयोग सदियों पुराना है। भारत में लोग मुंह में चबाकर और धूम्रपान के रूप में भी तंबाकू का उपयोग करते हैं।
भारत दुनिया में तंबाकू का दूसरा सबसे बड़ा उपभोक्ता देश है और दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा तंबाकू उत्पादक देश है। भारत में 42 करोड लोग धूम्रपान और चबाकर दोनों तरह से तंबाकू का उपयोग करते हैं। धूम्रपान में भारत में सबसे अधिक बीड़ी का उपयोग किया जाता है। भारत में पुरुषों में सभी तरह के पुरूष कैंसर मरीजों में से लगभग 45 प्रतिशत व महिलाओं में से लगभग 70 प्रतिशत कैंसर मरीज मुख के कैंसर से पीड़ित हैं।
वैज्ञानिकों के अनुसार चार हजार से अधिक प्रकार के रसायन तंबाकू के धुएं में पाए जाते हैं। तंबाकू में पाए जाने वाला मुख्य रसायन निकोटीन है जो अत्यधिक नशीला रसायन है। इसका लंबी अवधि तक प्रयोग व्यक्ति के शरीर को इसके सेवन का आदी बना देता है। लगातार तंबाकू के उपयोग से मनुष्य के शरीर का लगभग हर प्रमुख अंग प्रभावित होता है। जिस कारण उसके उपयोग करने वाले की मौत हो सकती है।