आयरलैंड में 1959 में जन्मी मिशेल बर्क जल्द ही कैनडा चली गईं। उन्होंने अपना मेकअप कैरियर प्रारंभ किया और फैशन शो आयोजित करने लगीं। लेकिन उनका मन फैशन शो में नहीं रम रहा था, उन्हें तो फिल्मों में जाना था। वहां अपना कमाल दिखाना था। शुरुआत में उन्होंने मेकअप असिस्टेंट के रूप में तीन फिल्मों में काम किया।
मिशेल का कहना है, ‘आप जितनी बार मेकअप में काम करते हैं, उतनी बार आपको नई चुनौती का सामना करना पड़ता है। सारे समय आपको सतर्क रहना पड़ता है। आप एक समूह के साथ काम करते हैं, समूह जो बहुत सृजनात्मक होता है। वे आपको अपनी राय देते रहते हैं। आपको डिजाइन,बजट, स्किन और बहुत सारी बातों का ध्यान रखना होता है।
55 फिल्मों में मेकअप का दायित्व संभालने वाली मिशेल बर्क कृत्रिम अंगों (Prosthetic) की विशेषज्ञ हैं। प्रत्यारोपण संबंधी उनका ज्ञान ‘ड्राकुला’, ‘मार्शल’, ‘बैड ड्रीम’ जैसी फिल्मों में देखा जा सकता है। शुरू में निर्देशकों और प्रड्यूसर्स को लगता था कि प्रयोगशाला अर्थात प्रत्यारोपण का काम पुरुष ही बेहतार ढ़ंग से कार सकते हैं, इससे उन्हें बहुत कोफ्त होती थी। लेकिन उन्होंने अपनी कुशलता का लोहा मनाव लिया। एक दिन ऐसा आया जब वे ‘क्वीन ऑफ हॉरर’ के नाम से जानी जाने लगीं।
हालांकि यह विशेषण उन्हें कम बजट वाली हरार फिल्मों हेतु काम करने के लिए मिला था। मगार वे लगी रहीं। आसान नहीं था यह सफर। पुरुष बहुल क्षेत्र में अपनी सम्मानित जगह बनाना। उन्होंने हार नहीं मानी और अपने श्रम, विशेषता एवं लगन से अपना मुकाम हासिल किया।
उन्हें पहला बड़ा ब्रेक तब मिला जब उनकी मुलाकात 1981 में फ्रेंच-कैनेडियन प्रोडक्शन से हुई। यह फिल्म ‘क्वेस्ट फॉर फायर’ के संदर्भ में था। इसमें उन्हें ऐसे पात्र तैयार करने थे, जो पृथ्वी पर तब रहते थे जब मनुष्य के इस रूप की शुरुआत नहीं हुई थी। सारा-का-सारा काम कृत्रिम अंगों के मेकअप से होना था। आगे निकला हुआ माथा, चौड़े, फैले हुए नथुने। यह काम और जटिल था, क्योंकि चार अलग-अलग समुदाय के लोगों का मेकअप होना था।
‘ड्राकुला’ फिल्म के लिए ऑस्कर
हर एक समुदाय में चालीस या उससे भी अधिक पात्र तैयार होने थे। काम बड़े पैमाने पर होना था। दो टीम बनीं, पहली टीम का संचालन सराह मोन्जानी ने किया, जिसमें अधिकतर लोग इंग्लिश थे। और दूसरी टीम जिसमें अधिकांश लोग केनडा से थे उसका दायित्व मिशेल के जिम्मे था। नतीजा हुआ दोनों को संयुक्त रूप से ऑस्कर मिला।
मिशेल मेकअप आर्टिस्ट होने के साथ-साथ चित्रकार हैं, वे मैक्स फैक्टर की स्पोकपर्सन भी हैं। इतना ही नहीं उन्होंने आंखों एवं होंठ हेतु कुछ प्रोडक्ट भी विकसित किए हैं। वे फिल्मों के साथ टी वी केलिए भी काम करत हैं। उन्हें उनका दूसरा ऑस्कर ‘ड्राकुला’ फिल्म के लिए मिला। इसमें उन्होंने ब्राम स्टोकर का मेकअप कार अभिनेता को बिल्कुल एक नया रूप प्रदान कर दिया है।
मेकअप के लिए उन्हें ब्रिटिश अकादमी का पुरस्कार भी दो बार मिला है। ‘मिशन इम्पोसीबल 3’, ‘मॉन्सटर हाउस’, ‘द सेल’, ‘माइनरिटी रिपोर्ट’, ‘स्पैंगलिश’ आदि उनके द्वारा मेकअप केलिए प्रसिद्ध कुछ अन्य फिल्में हैं। आजकल लॉस एन्जेलेस में रह रही मिशेल की इंडस्ट्री में काफी मांग है।
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