पीएम मोदी ने कर्तव्य भवन का उद्घाटन किया
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कभी जर्जर हालत थी, अब महत्वाकांक्षा और आत्मविश्वास...
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हालात को बदला। शहरों को विकास का इंजन और राष्ट्रीय गर्व का प्रतीक बनाया। यह बदलाव आज हर जगह दिखाई देता है। सेंट्रल विस्टा के पुनर्निर्माण ने कर्तव्य पथ को जनता की जगह बना दिया, नई संसद को भविष्य के अनुरूप संस्थान में बदल दिया और कर्तव्य भवन को सुचारु प्रशासनिक केंद्र बना दिया। जहां पहले जर्जर हालत थी, वहां अब महत्वाकांक्षा और आत्मविश्वास दिखता है।
कर्तव्य भवन और आसपास की जगहों का मुआयना करते पीएम मोदी (फाइल)
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16 गुना बढ़ गया शहरों का बजट
केंद्र सरकार का 2004-2014 के बीच शहरी क्षेत्र में निवेश करीब 1.57 लाख करोड़ रुपये था। 2014 के बाद से यह 16 गुना बढ़कर 28.5 लाख करोड़ हो गया है। 2025–26 के बजट में ही आवास एवं शहरी कार्य मंत्रालय को 96,777 करोड़ दिए गए। इतना बड़ा वित्तीय निवेश पहले कभी नहीं हुआ। इससे शहरी ढांचे का स्वरूप बदल रहा है।
- व्यापक आर्थिक और डिजिटल प्रगति ने इस रफ्तार को और तेज कर दिया है। भारत आज करीब 350 लाख करोड़ रुपये के साथ चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था हैं। यहां डिजिटल व्यवस्था रोजमर्रा की जिंदगी को चला रही है। यूपीआई से हर महीने 24 लाख करोड़ के लेन-देन हो रहे हैं।
- मेट्रो क्रांति बदलाव को अच्छी तरह दिखाती है। 2014 में 5 शहरों में 248 किमी की मेट्रो लाइन आज 23 से अधिक शहरों में एक हजार किमी से अधिक हो चुकी है। पुणे, नागपुर, सूरत और आगरा जैसे शहरों में नए कॉरिडोर बन रहे हैं। इससे सफर तेज, सुरक्षित और प्रदूषण-रहित हो रहा है।
- शहरी कनेक्टिविटी की तस्वीर पूरी तरह बदल गई है। एनसीआर के जाम से भरे इलाकों को दिल्ली की तीसरी रिंग रोड यूईआर-II से राहत मिल रही है, जो एनएच-44, एनएच-9 व द्वारका एक्सप्रेसवे को जोड़कर पुराने जाम के बिंदुओं को आसान बना रही है।
यह है बदलाव की यात्रा
आजादी के बाद की उपेक्षा से मोदी युग के आधुनिकीकरण तक। शास्त्री भवन की जर्जरता से कर्तव्य भवन की महत्वाकांक्षा तक। गड्ढों वाली सड़कों से एक्सप्रेसवे और हाई-स्पीड कॉरिडोर तक। धुएं से भरे रसोईघरों से पीएनजी तक। झुग्गियों से लाखों पक्के घरों तक। टूटे-फूटे हॉल से विश्वस्तरीय सम्मेलन केंद्रों तक। संकोच करती राजधानी से आत्मविश्वासी वैश्विक मेजबान तक।
जी-20 देशों का सम्मेलन: भारत ने वैश्विक हस्तियों की मेजबानी की
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दुनिया की मेजबानी का आत्मविश्वास
भारत ने जी-20 शिखर सम्मेलन सफलता से आयोजित किया। यशोभूमि सबसे बड़े सम्मेलन परिसरों में है, जहां हजारों प्रतिनिधियों का एकसाथ स्वागत किया जा सकता है। इंडिया एनर्जी वीक ने बेंगलुरु, गोवा व नई दिल्ली में दुनिया की ऊर्जा कंपनियों और विशेषज्ञों को आकर्षित किया, जिससे यह साबित हुआ कि हमारे शहर बड़े पैमाने पर और बेहतरीन ढंग से दुनिया की मेजबानी कर सकते हैं।
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण (फाइल)
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