पारिस्थितिक संतुलन एवं पर्यावरण की रक्षा के लिए पर्यावरण के संरक्षण, संवर्धन और विकास बारे में लोगों में जागरूकता पैदा करना सबसे कारगर कदम है।
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कुल मिला के मानें तो व्यापक स्वास्थ्य, सामाजिक और आर्थिक प्रभावों के बावजूद, अंतरराष्ट्रीय विकास एजेंडे में प्रदूषण की रोकथाम को बड़े पैमाने पर अनदेखा किया जाता है। इतनी बड़ी खबर से न्यूज पर पैनी नजर रखने वालों ने भी शायद ही ध्यान दिया हो।
व्यापक जागरूकता की आवश्यकता
पारिस्थितिक संतुलन एवं पर्यावरण की रक्षा के लिए पर्यावरण के संरक्षण, संवर्धन और विकास बारे में लोगों में जागरूकता पैदा करना सबसे कारगर कदम है। समाज को विशेष दिशा देना, उसे सशक्त करना, उसमें प्रभाव पैदा करने का काम मीडिया एवं पत्रकारिता का है। वह हमेशा से समाज का पथ प्रदर्शक और जन जन के हितों का सजग प्रहरी रहा है। ग्रामीण इलाके में अभी भी स्थनीय मीडियाकर्मी पर्यावरण के संरक्षण, संवर्धन और विकास के कई आयाम से वाकिफ नहीं है।
देश एवं विदेश में मीडिया संगठनों ने समय-समय पर विभिन्न पर्यावरणीय मुद्दों को उठा कर जनमानस में जनमत का निर्माण किया।
"पर्यावरण जागरूकता और पहल में परिसर और स्थानीय पत्रकारिता की भूमिका" नामक लेख में लेखक: मर्सिडीज अल्बर्टो का यह मानना है कि पृथ्वी के प्राकृतिक संसाधनों और पर्यावरण के निरंतर क्षरण के मुद्दे को विश्व की गंभीर समस्या के रूप में पहचाना जा रहा है।
पर्यावरण जागरूकता काफी विकृत है लेकिन उचित और व्यापक सूचना प्रसार के माध्यम से ठीक किया जा सकता है।
पर्यावरण जागरूकता में मीडिया का योगदान
पर्यावरण लेख सामान्य पर्यावरणीय मुद्दों जैसे प्रदूषण, बाढ़ और तूफान, वृक्षारोपण और ठोस अपशिष्ट प्रबंधन पर विषयों पर खबर प्रकाशित करते हैं। इन लेखों के अपने पाठक वर्ग हैं। पर्यावरण जागरूकता और पहल को बढ़ावा देने में समाचार पत्रों पर पर्यावरण पेज निकलना चाहिए, इससे लोगों में जागरूकता जागृत होगी। पहल हो तो पाठक भी बढ़ेंगे।
विश्व प्रसिद्ध न्यूज गार्जियन ने एक साल पहले 2019 से अपनी खबरों में जलवायु संकट को और भी अधिक प्राथमिकता देने का वादा किया था, परिणामस्वरूप एक वर्ष बाद औसतन हर तीन घंटे में पर्यावरण पत्रकारिता का एक अंश प्रकाशित किया जाता है। अक्टूबर 2020 में मीडिया संगठन ने बताया कि एक वर्ष में 3000 से अधिक आर्टिकल के माध्यम से 10 करोड़ पाठक मिले।
इन चुनौतियों पर विजय पर्यावरण के मुद्दों को व्यापक जन चिंता का विषय बना कर ही की जा सकती है। पर्यावरण के अनुकूल सामाजिक, राजनीतिक वातावरण का निर्माण कर ही हम पृथ्वी को बचाने में सक्षम होंगे अर्थात पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में जागरूकता के लिए विश्वव्यापी मुहिम चलाने की आवश्यकता है जिस में हर व्यक्ति को प्रकृति का दोस्त बनना होगा दुश्मन नहीं।
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