बढ़ते प्रदूषण ने पृथ्वी को सबसे ज्यादा नुकसान पहुंचाया है।
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खाद्य सुरक्षा को एक गंभीर खतरा समुद्रों में अम्ल की मात्रा बढ़ने से जुड़ा हुआ है। बिना ट्रीटमेंट के जो गंदगी और मानव अपशिष्ट तथा प्लास्टिक समुद्र में बहा दिए जाते हैं, यह उसका नतीजा है। रोजाना अरबों गैलन गंदगी समुद्र में बहा दी जाती है। हमारे समुद्रों में जाने वाला प्लास्टिक प्रदूषण फैलाने वाला सबसे बड़ा कारक है। प्लास्टिक का उपयोग शुरू हुए मुश्किल से पचास वर्ष हुए हैं, लेकिन इस ग्रह में उसी की वजह से सबसे अधिक प्रदूषण होता है। इस ग्रह का हर कोना एक बार इस्तेमाल किए गए प्लास्टिक के कूड़े से प्रदूषित है।
बढ़ रहा है प्रदूषण, कचरे से भर रहे हैं समुद्र
चीन, इंडोनेशिया, थाईलैंड, फिलीपींस और वियतनाम दुनिया में प्लास्टिक से सर्वाधिक प्रदूषण फैलाने वाले देशों में शुमार हैं। समुद्रों का तकरीबन एक तिहाई हिस्सा प्लास्टिक की गंदगी से अटा पड़ा है। समुद्र का पानी प्लास्टिक को विघटित कर देता है। प्लास्टिक के छोटे-छोटे कणों और अणुओं को मछलियां खा जाती हैं और इनके अंश मछलियों के शरीर में पाए गए हैं। इस तरह प्लास्टिक हमारी खाद्य शृंखला में शामिल होकर हमारी डाइनिंग टेबिल तक पहुंच जाता है। इससे मानव जीवन के लिए खतरा बढ़ता जा रहा है।
रोजाना अरबों गैलन बिना ट्रीटमेंट की गई गंदगी समुद्र में प्रवेश कर जाती है। जैसा कि ऊपर लिखा है कि ये समुद्र में अम्लता तो बढ़ाती ही है, इससे समुद्री जीवन को नुकसान पहुंचता है। वैज्ञानिकों का आकलन है कि यदि इसी दर से हम समुद्र को प्रदूषित करते रहे और नुकसान पहुंचाते रहे, तो 2048 तक समुद्र से मछलियां गायब हो जाएंगीं। तमाम तरह की प्रौद्योगिकी विकसित करने के बावजूद हमारा लालच कम नहीं हुआ है, बल्कि बढ़ता ही जा रहा है।
कुछ और की मनुष्य की इच्छा ने हमें गर्त के मुहाने पर ला खड़ा किया है। हमारा ग्रह हर वर्ष दस हजार प्रजाति के पौधों और जीव-जंतुओं को खो देता है। ब्रह्मांड में पृथ्वी ही ऐसा ग्रह है, जिसे जीवन उपहार में मिला है। और अधिक की हमारी चाहत के बीच, हम यह भूल गए हैं कि दुनिया के सारे अमीर मिलकर पानी की एक बूंद तक पैदा नहीं कर सकते।
हम सबके लिए जरूरी है कि पर्यावरण सुरक्षित रहे। जरूरत है एकजुट प्रयास की, ताकि पृथ्वी का संतुलन और पृथ्वी के अस्तित्व को विप्लवों से बचाया जा सके।
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