एक ऐसा निर्देशक जिसकी अधिकांश फ़िल्मों की थीम सामान्य लोगों के द्वारा असामान्य की खोज है, ये असामान्य चीजें कोई स्थान हो सकता है, कोई व्यक्ति हो सकता है, कोई जीव हो सकता है अथवा कोई वस्तु हो सकती है। इस निर्देशक की एक और विशेषता है इसकी फ़िल्मों के प्रमुख पात्र अक्सर टूटे-बिखरे परिवार से आते हैं, इन परिवारों में माता-पिता का तलाक हो चुका होता है, पिता या तो गायब होता है या फ़िर हिचकिहाट लिए, गैरजिम्मेदार व्यक्ति होता है। असल में यह निर्देशक का अपना अनुभव है, उसके माता-पिता का तलाक हुआ था।
इस अमेरिकी निर्देशक की कुछ फ़िल्मों के नाम हैं, ‘ई.टी. दि एक्स्ट्रा-टेरेस्ट्रियल’, ‘जॉज’, ‘एम्पायर ऑफ़ द सन’, ‘द कलर पर्पल’, ‘वेस्टसाइड स्टोरी’, ‘एमिस्टाड’, ‘लिंकन’, ‘वार ऑफ़ द वर्ल्ड्स’, ‘माइनोरिटी रिपोर्ट’, ‘ए. आई. आर्टिफ़ीसियल इंटेलिजेंस’, ‘सेविंग प्राइवेट राइन’, ‘सिंडलर’स लिस्ट’, ‘जोरासिक पार्क’...ओह लिस्ट समाप्त ही नहीं हो रही है।
अब तक 160 से ऊपर फिल्में प्रड्यूस करने वाले और 58 फ़िल्मों का निर्देशन करने वाले, 3 ऑस्कर पुरस्कार (1998 में ‘सेविंग प्राइवेट राइन’ तथा 1994 में ‘सिंडलर’स लिस्ट’ के सर्वोत्तम निर्देशक तथा ‘सिंडलर’स लिस्ट’ सर्वोत्तम पिक्चर का साझा पुरस्कार) जीतने वाले इस प्रसिद्ध अमेरिकी का नाम है स्टिवन स्पीलबर्ग। और अभी काम जारी है। 1987 में अकादमी ने उन्हें स्पेशल ऑनर दिया है।
द्वितीय विश्वयुद्ध पर बनाई फिल्में
सिने-इतिहास का एक सबसे प्रभावशाली, प्रेरक और धनी स्टिवन एलन स्पिलबर्ग 18 दिसम्बर 1946 को ओहायो के सिनसिनाटी में पैदा हुआ था। मां कॉन्सर्ट में पियानो वादक तथा रेस्तरां की मालकिन थी और पिता इलेट्रिकल इंजीनियर। पति-पत्नी दोनों रूस से आकर अमेरिका में बसे यहूदी थे। शायद यही कारण है बेटे ने होलोकास्ट से जुड़ी कई फ़िल्म बनाई तथा टॉम हैंक्स के साथ मिल कर द्वितीय विश्वयुद्ध पर ‘सूटिंग वार: वर्ल्ड वार II कॉम्बैट कैमरामेन’ डॉक्यूमेंट्री बनाई और उसी साल 2000 में होलोकास्ट पर एक और डॉक्यूमेंट्री ‘आईज ऑफ़ द होलोकास्ट’ प्रड्यूस की।
स्टिवन ने कैलिफोर्निया स्टेट यूनिवर्सिटी लॉन्ग बीच में पढ़ाई शुरू की लेकिन बीच में पढ़ाई छोड़ कर फ़िल्मों से जुड़ गए। शुरू में कुछ शॉर्ट फिल्में बनाई, ‘बैटल ग्राउंड’ में द्वितीय विश्वयुद्ध के फ़ुटेज का उपयोग किया गया है। 1961 में ‘इस्केप टू नोव्हेयर’ में द्वितीय विश्वयुद्ध में बच्चों को सैनिक के रूप में प्रस्तुत किया गया है।
‘फ़ायरलाइट’ का निर्देशन उनकी भविष्य की कई फ़िल्मों की दिशा-दशा तय कर देता है, इसमें एक कस्बे पर एलियन्स आक्रमण करते हैं। उन्होंने ‘एम्बलिन’ बनाई जिसमें रेगिस्तान की प्रमुखता है, यह भी भविष्य की फ़िल्मों का संकेत था।
कभी कॉफ़ी न चखने वाले स्टिवन स्पिलबर्ग ‘007’ मूवी के प्रशंसक हैं और उन्होंने इसमें काम करने वाले अभिनेताओं जैसे सॉन कोनरी, रॉबर्ट शॉ, बर्ट कॉव्क, ब्रूस ग्लोवर, क्रिस्टोफ़र ली, फ़्रैंक मैक्री, माइकेल लॉन्सडेल, जूलियन ग्लोवर, जॉन राइस-डेविस, क्रिस्टोफ़र वॉकेन, डेविड हार्बर आदि को अपनी फ़िल्म में निर्देशित किया है। लेकिन कोई भी फ़िल्म निर्देशित करने के पूर्व 4 फ़िल्म अवशय देखते हैं, ये फ़िल्म हैं, ‘सेवन समुराई’, ‘लॉरेन्स ऑफ़ अरेबिया’, ‘इट’स ए वंडरफ़ुल लाइफ़’ तथा ‘द सर्चर्स’।
मनोरंजन-भय के समागम वाली फिल्म
स्वयं को दर्शक मानने वाले तथा दर्शकों के विषय में सोचने वाले स्टिवन स्पिलबर्ग अपनी फ़िल्म ‘पोल्टेरजिस्ट’ में दर्शकों को एक साथ मनोरंजन तथा भय देना चाहते थे, उन्होंने इसमें हास्य और चीख को एक साथ मिलाया।
उन्होंने टीवी के लिए भी निर्देशन किया जिसमें ‘ड्युएल’, ‘डेनिस वीवर’, ‘रॉड सेर्लिंग’स नाइट गैलरी’, ‘कोलम्बो: मर्डर बाई बुक’ आदि का शामिल हैं। गोल्डी हॉन को लेकर निर्देशित की फ़िल्म ‘द शुगरलैंड एक्सप्रेस’ से उन्हें प्रसिद्धि मिलनी शुरू हुई जिसका ग्राफ़ ऊपर उठता गया। ‘जॉज’, ‘क्लोज एन्काउंटर्स ऑफ़ द थर्ड काइंड’ शुरुआती दौर की निर्देशित फ़िल्में हैं।
प्रोड्क्शन का कार्य उन्होंने 1978 में ‘आई वाना होल्ड योर हैंड’ से प्रारंभ किया फ़िर तो लाइन लगा दी। ‘द मेन इन ब्लैक: इंटरनेशनल’, ‘बंबलबी’, ‘फ़र्स्ट मैन’, ‘रेडी प्लेयर वन’, ‘दि एडवेंचर्स ऑफ़ टिनटिन’, ‘हेयरआफ़्टर’, ‘द लेजेंड ऑफ़ ज़ोरो’, ‘द मास्क ऑफ़ ज़ोरो’, ‘द टर्मिनल’, ‘लिंकन’, ‘फ़ाइंडिंग ऑस्कर’, ‘हू फ़्रेम रोजर रैबिट’... कुल 167 के बाद भी लिस्ट जारी है।