विश्व सिनेमा का इतिहास
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ऑर्सन वेल्स की फिल्में
अपनी फ़िल्मों के अलावा ऑर्सन वेल्स ने ‘द स्पेनिश अर्थ’, ‘स्विस फ़ैमिली रॉबिंसन’, ‘जर्नी इनटू फ़ीयर’, ‘जेन एयर’, ‘फ़ॉलो द ब्यॉज’, ‘टुमारो इज़ फ़ॉर एवर’, ब्लैक मैजिक’, ‘द थर्ड मैन’, ‘प्रिंस ऑफ़ फ़ॉक्सेस’, ‘द ब्लैक रोज’, ‘किंग लियर’, ‘ट्रबल इन द ग्लेन’, ‘थ्री केसेस ऑफ़ मर्डर’, ‘नेपोलियन’, ‘मोबी डिक’ के अलावा अन्य तमाम फ़िल्मों (एक सूत्र के अनुसार उसने कुल 61 फ़िल्मों में काम किया था।) में अभिनय भी किया।
ऑर्सन वेल्स ने 1941 में ‘सिटिजन केन’ बनाई। वह इस फ़िल्म का निर्देशक, प्रड्यूसर, सह-लेखक, एडीटर और प्रमुख अभिनेता सब कुछ है। वेल्स ने छाया के संयोजन, संगीत, सेट, ड्रेस, कलाकारों के चुनाव, कैमरा एंगल्स, अभिनय के बेहतरीन चुनाव से एक कालजयी फ़िल्म का निर्माण किया है। तमाम अड़चनों के बावजूद फ़िल्म ने 11 पुरस्कार जीते, जिसमें एक ऑस्कर भी शामिल है। इसका एक दृश्य फ़िल्मांकन का नायाब नमूना है।
शुरुआती सफ़लता के दिनों में केन अमेरिका के राष्ट्रपति की भतीजी एमिली नोर्टन से विवाह करता है। उनका यह विवाह कुछ सालों के लिए ही रहता है। इन कुछ सालों में क्या कुछ बदलता है, दोनों के रिश्तों की पूरी कहानी का फ़िल्मांकन अपनी विशेषता के लिए सिनेमा के इतिहास में सदा के लिए दर्ज है। गजब का मोंटेज है इस दृश्य में। दोनों ब्रेकफ़ास्ट टेबल पर बैठे हैं, वक्त के साथ उनका रूप-रंग, व्यवहार, भाषा-बोली-बानी सब बदलती जाती है। बड़ी तेजी से सब कुछ घटित होता है।
मेकअप मैन मॉरिस सैडरमैन के मेकअप का कमाल है कि बारह-सोलह साल के लंबे समय को हर दो साल के एक शॉट में समेटा गया है। मजे की बात है मॉरिस सैडरमैन मेकअप विभाग का प्रमुख न हो कर मात्र एक अपरेंटिस था। विशेष बात है कि इस पूरे दृश्य का फ़िल्मांकन मात्र एक दिन में हुआ था। आसान नहीं है हर दो साल में हुए व्यक्तित्व और वेशभूषा को भिन्न रूप में दर्शाना।
हर बार दोनों पात्रों का मेकअप और ड्रेस बदल जाता है, मुद्रा बदल जाती है, पर लोकेशन वही डायनिंग टेबल रहता है। समय और स्थान को संपादन की कुशलता से साधा गया है। पूरा-का-पूरा दृश्य केवल दो मिनट में समेटा गया है।
दशक की शीर्ष फ़िल्म ‘जीन डिएलमैन, 23 के डु कॉमर्स, 1080 ब्रसल्स’ के अलावा सूची में छठवें नंबर पर ‘2001: ए स्पेस ओडिसी है, दसवें नंबर पर 1952 में बनी ‘सिंगिंग इन द रेन’ है। हां, भारत से एकमात्र फ़िल्म सूचि में है, आपका अनुमान ठीक है, ‘पथेर पांचाली’ पैंतीसवें नंबर पर है और 41वें पायदान के लिए दो नाम में टाई हुई और फ़िल्में हैं, ‘बाइसिकल थीव्स’ तथा राशोमोन’।
95वें नंबर के लिए पांच फ़िल्मों में टाई हुई और इस तरह सौंवे नंबर पर 2017 की फ़िल्म ‘गेट आउट’ दूसरी तमाम फ़िल्मों को गेट आउट करती हुई यह सूची पूरी होती है।
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