अरविंद केजरीवाल के लिए आत्मचिंतन का वक्त
- फोटो : पीटीआई
कांग्रेस बढ़ा सकती है मुश्किलें
यदि कांग्रेस अपने खोए मैदान को वापस ले रही है और खासकर मुस्लिम क्षेत्रों में उसका प्रदर्शन अच्छा रहा है तो यह आम आदमी पार्टी को चिंता में डालने वाला होगा। वर्ष 2025 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस ने अपने पुराने वोटबैंक में थोड़ी और बढ़त बना ली तो निश्चित ही अरविंद केजरीवाल के लिए चौथी बार सरकार बनाना बेहद मुश्किल हो जाएगा। फिर उन्होंने नगर निगम चुनाव में जो लंबे-चौड़े वादे किए हैं, उनकी परख भी जनता करेगी। दिल्ली सरकार के साथ नगर निगम भी पास आने के बाद अरविंद केजरीवाल के पास कोई बहाना नहीं रह जाएगा।
दिल्ली में सालों-साल से खड़े कूड़े के पहाड़ों को साफ करने का सबसे बड़ा वादा अरविंद केजरीवाल ने इस चुनाव में किया है। दिल्ली के एजुकेशन और हेल्थ सिस्टम को वो पहले ही वर्ल्ड क्लास बताते आ रहे थे, अब नगर निगम के अंतर्गत आने वाले स्कूल और अस्पताल भी उन्हीं के जिम्मे आ गए हैं। आवारा जानवरों की समस्या दूर करने का जो वादा अरविंद केजरीवाल ने किया है, उसका रोडमैप कैसे बनाएंगे?
यह देखना दिलचस्प होगा, क्योंकि आवारा जानवरों की समस्या केवल दिल्ली की नहीं है, यह देश भर की समस्या है। आवारा जानवरों से निजात पाने का कोई ठोस तरीका अब तक कोई राज्य खोजा नहीं पाया है।
पार्किंग की समस्या को दूर करने की बात अरविंद केजरीवाल ने की है। यह तो सर्वविदित है कि दिल्ली में गाड़ियां ज्यादा हैं और पार्किंग कम। क्या मल्टीलेवल पार्किंग सिस्टम्स की बाढ़ दिल्ली में आने वाली है? दिल्ली को पार्क सिटी बनाने का वादा भी आम आदमी पार्टी ने किया है। अच्छा वादा है, लेकिन जमीन के अभाव में यह पूरा कैसे होगा? यह देखना रोचक होगा।
वादों पर खरे उतर पाएंगे केजरीवाल
पिछले सालों में एमसीडी कर्मचारियों के वेतन की समस्या रही है। जब नगर निगम पर भाजपा काबिज थी तो वह अरविंद केजरीवाल पर ही बजट रोकने का आरोप लगाती थी। दिल्ली नगर निगम का बजट 15,276 करोड़ का है। उम्मीद है कि कर्मचारियों को अब वेतन की समस्या नहीं आएगी।
अरविंद केजरीवाल यदि वादों पर खरे नहीं उतरे तो पहले वर्ष 2024 के लोकसभा चुनाव और उसके बाद वर्ष 2025 के विधानसभा चुनाव में यही जनता सबक सिखाएगी। कभी एक्टिविस्ट रहे अरविंद केजरीवाल अब नेता बन चुके हैं। बड़े वादे करने और उन्हें पूरा करने के अंतर को वो बखूबी समझते हैं।
शायद यही कारण है कि नगर निगम में जीत के बाद उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सहयोग से दिल्ली का विकास कराएंगे। सहयोग मिलेगा या आरोप-प्रत्यारोप जारी रहेंगे, यह देखना दिलचस्प होगा।
डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यह लेखक के निजी विचार हैं। आलेख में शामिल सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है। अपने विचार हमें blog@auw.co.in पर भेज सकते हैं। लेख के साथ संक्षिप्त परिचय और फोटो भी संलग्न करें।