किंग फारुक के समय जो फिल्में प्रतिबंधित थीं, वे तत्काल रिलीज हुईं। देशप्रेम और उपनिवेश विरोधी फिल्में बनने लगीं। इसी तरह की एक फिल्म है, ‘देयर इस ए मैन इन अवर हाउस’ (निर्देशन: हेनरी बरकत)। इसमें नायक प्रसिद्ध अभिनेता ओमर शरीफ हैं। कमेडियन इस्माइल यसिन को लेकर कॉमेडी शृंखला बनी। साहित्यिक कृतियों पर भी फिल्में बनीं। नोबेल पुरस्कृत प्रसिद्ध साहित्यकार नजीब महफूज के उपन्यास पर हुसैन कमाल ने ‘अड्रिफ्ट ऑन द नाइल’ बनाई।
115 मिनट की यह फिल्म 1967 के छ: दिन के युद्ध की पृष्ठभूमि पर बनी है और पलायन, सामान्य-फ्रस्ट्रेटेड मिस्री लोगों को दिखाती है।
प्रसिद्ध सिने-निर्देशक यौसेफ शाहीन की ‘कैरो स्टेशन’ ऑस्कर के लिए भेजी जाने वाली पहली मिस्री फिल्म थी। ओमर शरीफ को ‘लॉरेन्स ऑफ अरेबिया’ तथा ‘डॉक्टर जिवागो’ के लिए गोल्डेन ग्लोब पुरस्कार प्राप्त हुआ। फतेह हमामा इस काल की प्रसिद्ध अभिनेत्री थी, उसे ‘स्टार ऑफ द सेंचुरी’ का खिताब प्राप्त हुआ। 1955 में हमामा तथा ओमर शरीफ ने शादी कर ली।
इक्कीसवीं सदी की फिल्में
इक्कीसवीं सदी की बात करें तो राष्ट्रपति सदात के जीवन पर मोहम्मद खान ने 165 मिनट की ऐतिहासिक फिल्म बनाई। निली करीम, बुशरा आदि को लेकर मोहम्मद दिआब ने 2010 में ‘कैरो 678’ बनाई। इसी साल कॉमेडी ‘बिटरस्वीट’ भी बनी। मिस्र के 2011 के विद्रोह को लेकर दस भिन्न निर्देशओं ने दस अलग-अलग कहानियां लेकर प्रयोगात्माक फिल्म ’18 डेज’ बनाई। हम जीवन में जो विकल्प अपनाते हैं, उसी से हमारा जीवन बनता है, इस कथानक पर अहमद अब्दाला ने 2014 में 105 मिनट की ‘डेकोर’ बनाई।
2016 में हादी एल बगौरी ने ‘हेप्टा: द लास्ट लेक्चर’ बनाई। डॉक्टर शुक्री मोख्तार एक जाना-माना सामाजिक मनोवैज्ञानिक है। वह सामान्य प्रश्नों का उत्तर भी बड़ी कुशलता से देता है। ‘हम कैसे प्यार करते हैं?’ इस सरल प्रश्न पर वह एक अंतिम लेक्चर देना तय करता है।
2014 में मिस्र से प्रसिद्ध फिल्म ‘द ब्लू एलिफेंट’ आई। 170 मिनट की यह हॉरर-रहस्य-हत्या की फिल्म एक मनोचिकित्सक डॉक्टर येहिया (करीम अब्देल अजीज) की कहानी है। वह पागल अपराधियों के इलाज वाले विभाग में काम करता है। उसने 5 साल के लिए काम छोड़ा हुआ है, फिर जब वह अस्पताल लौटता है। उसे जो पता चलता है, उसके साथ जो होता है, वह उसने कभी ख्वाब में भी न सोचा था। जटिल फिल्म ‘ब्लू एलिफेंट’ को 2015 का कैरो नेशनल फेस्टिवल फॉर इजिप्शियन सिनेमा का सर्वोत्तम अभिनेता (करीम अब्देल अजीज) तथा सर्वोत्तम अभिनेत्री (निली करीम) पुरस्कार प्राप्त हुआ।
मिस्री सिनेमा से सिने-जगत को बहुत उम्मीदें हैं।
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