वर्तमान समय में कैंसर एक भयानक बीमारी के रूप में उभरकर सामने आया है। इसकी चपेट में हर वर्ष सबसे अधिक लोग आते हैं और समय पर इलाज नहीं हो पाने के कारण सर्वाधिक लोग असमय ही मर जाते हैं। ये सही है कि कैंसर का इलाज मुश्किल पर नामुमकिन नहीं। कैंसर को लेकर लोगों में अनभिज्ञता और उदासीनता को कम करने तथा इस रोग के प्रति उन्हें जागरूक बनाने, शिक्षित करने, इससे संबंधित मिथकों को मिटाने के लिए प्रतिवर्ष विश्वभर में 4 फरवरी को 'विश्व कैंसर दिवस' मनाया जाता है।
कैसे हुई कैंसर दिवस की शुरुआत
गौरतलब है कि 1993 में अंतर्राष्ट्रीय कैंसर नियंत्रण संघ ने स्विट्जरलैंड के जिनेवा में पहली बार कैंसर दिवस मनाया था। लेकिन इस दिवस को मनाने की विधिवत शुरुआत वर्ष 2005 से हुई थी। तब से यह दिवस हर वर्ष कैंसर को कलंक मानने वाली मानसिकता के पतन के लिए प्रयासरत है। दरअसल, कैंसर का तात्पर्य शरीर में अनियंत्रित रूप से वृद्धि करने वाली कोशिकाओं से हैं। यह अनावश्यक रूप से वृद्धि कर ऊतक को प्रभावित करती है तथा शरीर के बचे हुए भाग को इसके संपर्क में ले लेती है।
कितने तरह का होता है कैंसर? कौन लोग होते हैं कैंसर के शिकार
कैंसर एक ऐसा रोग है जो किसी भी उम्र में हो सकता है। यह एक साल के बच्चे से लेकर 80 साल के बुजुर्ग तक में पाया जा सकता है। वैसे तो कैंसर के सौ से अधिक प्रकार हैं लेकिन इनमें स्तन कैंसर, सर्वाइकल कैंसर, ब्रेन कैंसर, बोन कैंसर, ब्लैडर कैंसर, पेंक्रियाटिक कैंसर, प्रोस्टेट कैंसर, गर्भाशय कैंसर, किडनी कैंसर, लंग कैंसर, त्वचा कैंसर, स्टमक कैंसर, थायरॉड कैंसर, मुंह का कैंसर व गले का कैंसर प्रमुख है।
आमतौर पर शरीर के वजन बढ़ने व शारीरिक सक्रियता में कमी आने तथा दोषपूर्ण व असंतुलित खान-पान, व्यायाम नहीं करने, नशीले पदार्थों के रूप में अल्कोहल की अधिक मात्रा का सेवन करने से इस रोग के शिकार होने की संभावना अधिक रहती है। चाय और कॉफी जैसे पेय पदार्थों के आदी व्यक्ति को भी कैंसर होने का ज़्यादा खतरा रहता है क्योंकि चाय और कॉफी में चार हजार से अधिक घातक तत्व पाये जाते हैं।
इसके अलावा मोटापे से ग्रस्त व्यक्ति में कैंसर होने की अधिक संभावनाएं होती हैं। कैंसर एक आनुवांशिक बीमारी होने के कारण कई बार कैंसर से पीड़ित माता-पिता केे जीन के माध्यम से यह बीमारी उनकी संतान में भी आ जाती है। वहीं दवाओं के साइड इफेक्ट्स से भी कैंसर होने की बात की जाती है।