साइकिल का फायदा सेहत को भी पहुंचता है।
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लॉकडाउन में हम यह देख चुके हैं कि बिना वाहनों और फैक्ट्रियों के चले यह हवा कितनी शुद्ध रहती है। साइकिल के प्रयोग से पृथ्वी के लिए गम्भीर होते जा रहे वायु प्रदूषण की इस समस्या पर लगाम लगाई जा सकती है।
बुज़ुर्ग, जवान और बच्चें हर आयु वर्ग के लोग साइकिल की सवारी कर खुद को चुस्त और दुरस्त रख सकते हैं। साइकिल की सवारी मनुष्य को मानसिक और शारीरिक रूप से मज़बूत बनाने का कार्य करती है।
इसमें अन्य व्यायामों की तरह ना चोटिल होने का डर है औऱ ना ही इसे चलाने में किसी विशेष तकनीकी ज्ञान की जानकारी की आवश्यकता।
रोज़ाना साइकिल चलाने से शरीर की मांसपेशियां मज़बूत होती हैं और शरीर में वसा भी नहींं बनती। उच्च रक्तचाप और ह्रदय रोगों को साइकिल की सवारी पीछे छोड़ देती है।
शोध में सामने आया है कि निरंतर साइकिल चलाने वालों को मधुमेह और हृदयाघात का खतरा अन्य लोगों से कम रहता है।
यह सच है कि साइकिल को वक़्त ने चुनौती दी है। सड़क पर दौड़ती बसें, ट्रक, कार, महंगी मोटरसाइकिल साइकिल चलाने वाले को रफ़्तार में कहीं पीछे छोड़ देती हैं। इस तेज़ रफ़्तार के साथ चल रही ज़िंदगी में हर किसी को वक्त की कमी है। मनुष्य ने विकास के पीछे अंधी दौड़ लगायी हुई है। उसमें साइकिल के सफ़र में लगता ज्यादा समय मनुष्य को चुभने लगता है।
पर कोरोना ने दिखा दिया है कि कैसे प्रकृति मनुष्य की रफ़्तार को कभी भी रोक सकती है और वैसे भी मेट्रो स्टेशनों की भीड़, बसों की दमघोंटू भीड़ और असुरक्षित तेज़ दौड़ती साइकिल से दूर एक साइकिल के सफ़र का आनन्द ही कुछ और है।
साइकिल चलाते ना ऑटो का कानफोड़ू संगीत है ना एक दूसरे को घूरते सफ़र करते लोगों के बनावटी चेहरे। वहांं है तो सिर्फ आपका सुधरता स्वास्थ्य और आपकी खुद से होती बात जो आज के सामाजिक परिदृश्य में कहीं खो सी गई है।
साइकिल सवारों के लिए मुख्य सड़क से अलग लेन का निर्माण इस सफर को सड़क पर तेज़ दौड़ते वाहनों से सुरक्षित बना सकता है। साइकिल सवारी के दौरान हेल्मेट का प्रयोग अनिवार्य करना चाहिए और इस विश्व साइकिल दिवस के दिन सरकार को बिना किसी देरी के साइकिल की सवारी को शान की सवारी बनाने पर गम्भीरता से विचार करना शुरू कर देना चाहिए।
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