इस साल प्रवासी पक्षियों की संख्या एक लाख के पार
2022 में की गई गणना के अनुसार, 1,10,309 प्रवासी पक्षी इस साल में दर्ज किए गए हैं। पिछले कुछ सालों से ना केवल प्रवासी पक्षियों की संख्या में बढ़ोतरी पाई गई है, बल्कि कई नई प्रजातियां हर साल इस सूची में शामिल हो रही हैं। इनकी खुराक भी इनके अलग-अलग रहने के तरीकों की वजह से अलग अलग होती है, मगर पांग हर एक पक्षी का ख्याल रखना जनता है।
जहां पानी वाले पंछियों के लिए ताज़े पानी की मछलियां जैसे मशीर, कतला और सिंघारा, पानी के पौधे मुख्य ख़ुराक बन जाती हैं तो वहीं छोटे पंछी अन्य छोटे कीड़े-मकोड़े और जानवर खाते हैं। कई बड़े पक्षी छोटे पंछियों को भी खा कर अपना पेट भरते हैं। ताजे पानी का स्रोत होने की वजह से पांग के आस-पास के इलाके खेती के लिए भी अनुकूल हैं और अक्सर कई तरह के पक्षी इन खेतों में वनस्पति का आनंद लेते हुए दिख जाते हैं।
अक्तूबर आते ही प्रवासी पक्षियों का आगमन भी हो जाता है और नवंबर तक सभी मुख्य प्रजातियां यहां पहुंच जाती हैं। मगर सर्दियों में होने वाले कोहरे की वजह से ये पंछी कम दिखाई देते हैं। जनवरी और फरवरी के महीने इनको देखने के लिए सबसे उपयुक्त हैं क्योंकि इस समय इन पंछियों की संख्या सबसे अधिक होती है। फरवरी के समाप्त होने के साथ साथ ये पंछी भी वापस रवाना होना शुरू कर देते हैं और मार्च तक काफी प्रजातियां अपने घर की और प्रस्थान कर लेती हैं। मगर कभी कभी कुछ-एक पक्षी काफी देर तक भी यहां देखने को मिल जाते हैं।
इस सबकी जानकारी, वन्यजीवन की गणना, निगरानी व सुरक्षा के लिए वन-विभाग द्वारा कई प्रबंध किए गए हैं। वन-रक्षक या फारेस्ट गॉर्ड यहां हर वक़्त तैनात रहते हैं जिससे हानिकारक तत्वों से होने वाले नुक्सान जैसे अवैध शिकार, खतरनाक कीटनाशक का इस्तेमाल, कूड़ा-करकट इत्यादि को रोका जा सके। इसके अलावा एक और अहम कार्य 'टैगिंग या बर्ड-टैगिंग' भी वन-विभाग द्वारा किया जाता है।
पांग में टैग किए जा चुके पंछी कई बार वापिस अगले वर्षों में फिर से दिखाई दिए हैं। इनके अलावा अन्य जगह पर टैग किए जा चुके पंछी भी यहां दिखाई देते रहते हैं।
पांग प्रवासी पक्षियों के लिए हमेशा ही प्रसिद्ध रहा है। इसकी भौगोलिक स्थिति, ब्यास के ताजे पानी और बेइन्तेहां खाने के स्रोत इसे सभी पशु-पक्षियों के रहने के लिए अनुकूल बनता है। पंछी-प्रेमी, नेचर-लवर्स और सार्वजनिक पर्यटक भी यहां इसकी खूबसूरती को देखने के लिए हर साल आते हैं।
पश्चिम में शाम के वक्त डूबते हुए सूरज का नज़ारा और पीछे हर वक़्त अपने विशाल रूप में अटल खड़े हुए धौलाधार नामक हिमालय की श्रृंखला यहां की ख़ूबसूरती को और भी बढ़ा देते हैं। आप भी अगली बार अगर हिमाचल जाए तो इस जगह पर घूमना न भूलें।
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