ओसाका से मिले वैज्ञानिक प्रमाण साबित करते हैं कि यदि भूजल दोहन रोका जाए, तो धंसती हुई जमीन को फिर से ऊपर उठाया जा सकता है। इसके लिए क्या और क्या करना चाहिए। आइए, इस ब्लॉग से समझते हैं...
भूजल दोहन के कारण दुनिया के तटीय शहर धंसने लगे हैं। जैसे-जैसे जलवायु गर्म हो रही है, ये तटीय शहर समुद्र के बढ़ते जलस्तर के प्रति भी ज्यादा संवेदनशील होते जा रहे हैं। नए शोधों के अनुसार, अगर भूजल दोहन रोक दिया जाए और भूजल बढ़ाने के उपाय किए जाएं, तो शहर ऊपर उठ सकेंगे।
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तटीय शहरों के धंसने की समस्या वैश्विक बन चुकी है। जकार्ता के कुछ हिस्से हर साल दस सेंटीमीटर से ज्यादा धंस रहे हैं। चीन का तटीय शहर तियानजिन भी धंसता जा रहा है। अगर वहां जमीन का धंसना जारी रहा, तो साल 2120 तक शहर की 15 फीसदी आबादी पानी के नीचे होगी। सैन डिएगो से ईरान तक कई शहर भूजल दोहन से प्रभावित हैं। न्यूजीलैंड में शहरी तट रेखा का लगभग 80 फीसदी हिस्सा धंस रहा है। दरअसल, जब भूजल निकाला जाता है, तो जमीन धंस जाती है।
तटीय इलाकों में यह समस्या और गंभीर है। इसे कम करने के लिए बेहतर भूजल प्रबंधन को अहम माना जाता है। पर, यह स्पष्ट नहीं है कि लंबे समय बाद भूजल भंडार में पानी का स्तर बढ़ने पर जमीन कैसे प्रतिक्रिया करती है। इसकी जांच के लिए ओसाका को प्राकृतिक प्रयोगशाला के रूप में चुना गया। 1920 और 1960 के दशक के बीच बड़े पैमाने पर भूजल निकालने से ओसाका का भूजल स्तर 30 मीटर तक गिर गया था और कुछ जगहों पर जमीन दो मीटर से ज्यादा धंस गई थी।
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कड़े नियम लागू होने के बाद भूजल स्तर लगातार सुधरा। ग्रेटर ओसाका में जमीन अब तेजी से ऊपर उठ रही है। जिन जगहों पर पानी का स्तर सबसे तेजी से बढ़ा, वहीं जमीन भी सबसे तेजी से ऊपर उठी। हालांकि, जमीन के ऊपर उठने का पैटर्न हर जगह एक जैसा नहीं था। ये बदलाव शहर के आर-पार संकरे कॉरिडोर के रूप में दिखे, जो लगभग पूरी तरह से जानी-मानी टेक्टोनिक फॉल्ट लाइनों (जमीन के नीचे की दरारों) से मेल खाते थे। ये दरारें जमीन के नीचे बांध की तरह काम करती हैं और पानी के बहाव को रोकती हैं। शोध के अनुसार, भूजल दोहन कम करने और जलभंडारों को फिर से भरने से भूमि के धंसने की रफ्तार को कम किया या रोका भी जा सकता है।