इन मामलों का राजनीतिक असर केवल अभिषेक बनर्जी तक सीमित नहीं रहा। मुख्यमंत्री और टीएमसी सुप्रीमो ममता बनर्जी लगातार इन्हें केंद्र सरकार की "राजनीतिक प्रतिशोध की राजनीति" का हिस्सा बताती रही हैं। उनका आरोप है कि विपक्षी नेताओं को केंद्रीय एजेंसियों के जरिए परेशान किया जा रहा है, जबकि भाजपा का कहना है कि कानून अपना काम कर रहा है और भ्रष्टाचार के मामलों में किसी को भी बख्शा नहीं जा सकता। ऐसे में अभिषेक बनर्जी के खिलाफ चल रही जांचें केवल कानूनी नहीं, बल्कि पश्चिम बंगाल की राजनीति की सबसे बड़ी लड़ाइयों में से एक बन चुकी हैं।
क्या हैं मामले, कितनी जांचें हुईं और क्या है वर्तमान कानूनी स्थिति?
सोनारपुर घटना के बाद ममता का हमला
सत्ता परिवर्तन के बाद अभिषेक बनर्जी के संसदीय क्षेत्र डायमंड हार्बर के सोनारपुर में उन पर हुए हमले के बाद ममता बनर्जी ने केंद्र और प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने दावा किया कि अभिषेक बनर्जी को अस्पताल में उचित इलाज नहीं मिलने दिया गया और कथित रूप से अस्पताल प्रशासन पर उन्हें जल्द छुट्टी देने का दबाव बनाया गया। ममता बनर्जी ने कहा कि लोकतंत्र में राजनीतिक विरोध का जवाब हिंसा, धमकी या जांच एजेंसियों के जरिए नहीं दिया जाना चाहिए। उनके इस बयान के बाद एक बार फिर अभिषेक बनर्जी से जुड़े मामलों पर राजनीतिक बहस तेज हो गई।
अभिषेक के खिलाफ कौन-कौन सी जांचें हुईं?
यह समझना जरूरी है कि किसी व्यक्ति के खिलाफ जांच, पूछताछ, समन और आपराधिक मुकदमा चार अलग-अलग कानूनी अवस्थाएं होती हैं। किसी मामले में पूछताछ या समन जारी होने का अर्थ दोष सिद्ध होना नहीं होता। अभिषेक बनर्जी के मामले में भी अधिकांश जांचें अभी अंतिम निष्कर्ष तक नहीं पहुंची हैं।
1- कोयला तस्करी और मनी लॉन्ड्रिंग मामला
यह सबसे चर्चित मामला है। पश्चिम बंगाल और पड़ोसी राज्यों में कथित अवैध कोयला खनन और तस्करी से जुड़े धनशोधन मामले में ईडी और सीबीआई ने कई बार अभिषेक बनर्जी और उनके परिवार के सदस्यों से पूछताछ की। कई समन जारी किए गए और दिल्ली तथा कोलकाता में लंबी पूछताछ हुई। हालांकि अभी तक इस मामले में अदालत द्वारा उनके खिलाफ कोई अंतिम दोष सिद्ध नहीं हुआ है।
2- शिक्षक भर्ती घोटाला
पश्चिम बंगाल के बहुचर्चित शिक्षक भर्ती घोटाले की मनी लॉन्ड्रिंग जांच के दौरान ईडी ने अभिषेक बनर्जी को पूछताछ के लिए समन जारी किया। जांच एजेंसी यह पता लगाने का प्रयास कर रही थी कि कथित अवैध धन के प्रवाह का कोई संबंध उनसे या उनके सहयोगियों से है या नहीं। इस मामले में भी जांच जारी है।
3- 'साइनगेट' मामला
कलकत्ता हाईकोर्ट में लंबित कथित फर्जी हस्ताक्षर मामले में पश्चिम बंगाल सीआईडी जांच कर रही है। आरोप है कि कुछ दस्तावेजों में हस्ताक्षरों को लेकर अनियमितता हुई। सीआईडी इस मामले में कई बार पूछताछ कर चुकी है।
4- चुनावी भाषण और कथित हेट स्पीच
लोकसभा चुनाव के दौरान दिए गए कुछ भाषणों को लेकर शिकायत दर्ज होने के बाद सीआईडी ने अभिषेक बनर्जी को समन भेजा। जांच इस बात को लेकर है कि क्या उनके भाषण चुनावी आचार संहिता या अन्य कानूनी प्रावधानों का उल्लंघन करते हैं।
5- वॉयस सैंपल मामला
'डीजे' टिप्पणी मामले में वॉयस सैंपल लेने के लिए बिधाननगर अदालत ने अभिषेक बनर्जी को फिर तलब किया है। पहले वह अदालत में पेश नहीं हुए थे। सीआईडी उनकी आवाज़ का नमूना लेकर जांच आगे बढ़ाना चाहती है। कलकत्ता उच्च न्यायालय ने भी जांच एजेंसी की प्रक्रिया में हस्तक्षेप से इनकार किया है।
6- आवास पर पुलिस कार्रवाई
अभिषेक बनर्जी के घर पर पुलिस कार्रवाई और तलाशी को लेकर विवाद उत्पन्न हुआ। मामला अदालत पहुंचा, जहां कलकत्ता हाइकोर्ट ने पुलिस से विस्तृत जवाब मांगा। इस मामले में भी अंतिम निर्णय अभी लंबित है।