विमल सुरेका का इलाके में छापाखाना है। उनका मानना है कि वोट तो किसी को भी देना ही है, लेकिन उनकी नजर में मुद्दा कोई नहीं है। कारोबार करने वाले चाहते हैं कि उन्हें शांतिपूर्ण माहौल चाहिए, यह बीते सालों से बंगाल में कायम है। हम लोग नहीं चाहते कि माहौल बदले और किसी तरह की अशांति पैदा हो। गोविंद रावत कहते हैं कि बंगाल के हर चुनाव में कोई न कोई मुद्दा रहता है,लेकिन इस बार कोई मुद्दा नहीं है।
इलाके में तीन गुरूद्वारे हैं, गुरूद्वारे गुरूद्वारा छोटा सिख संगत में एक सिख श्रद्धालु गुरमीत सिंह ने बताया कि यहां ट्रांसपोर्ट कारोबार पर सिखों का कब्जा रहा है, लेकिन बीते सालों में केंद्र सरकार की नीतियों के कारण यह तबाह हो गया है। किसान आंदोलन को लेकर मोदी सरकार ने जिस तरह से हठी रवैया अपना रखा है, इलाके के सिख भाजपा को वोट नहीं देंगे। अखबार विक्रेता भी मानते हैं कि कारोबार तबाह हो गया है।
विधानसभा चुनाव में हमेशा स्थानीय मुद्दे रहते हैं, लेकिन इलाके के कई कारोबारी मानते हैं कि केंद्र सरकार के बीते साल के फैसलों से उनका कारोबार करना मुशिकल हो गया है। कई लोगों का कहना है कि बंगाल में भाजपा की हार से केंद्र अपने गलत फैसलों पर पुनर्विचार करेगी।
किसान आंदोलन के समर्थक कई लोगों ने बताया कि बंगाल नतीजों की आशंका को देखते हुए किसानों से बातचीत की बातें सुनाई देने लगी हैं। एक कालेज छात्र शंकर ने बताया कि केंद्र सरकार रेलवे से लेकर बैंक, हवाई जहाज से लेकर सब कुछ निजी हाथों में सौंप रहे हैं, ऐसे में हमारे भविष्य पर अंधकार मंडरा रहा है। राज्य में भी रोजगार के अवसर नहीं दिखते और केंद्र में नौकरी के अवसर समाप्त होते जा रहे हैं।
डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यह लेखक के निजी विचार हैं। आलेख में शामिल सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है।